JSS आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल द्वारा 'संहिता अवबोधिनी' राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ जोड़ना है।

  • 11 सितंबर को मैसूरु के श्री राजेंद्र सेंटेनरी ऑडिटोरियम में सम्मेलन का आयोजन।
  • शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामी की 111वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजन।
  • प्राचीन संहिता और सिद्धांत को आधुनिक चिकित्सा पद्धति से जोड़ने पर जोर।

मैसूरु के JSS आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का संहिता और सिद्धांत विभाग शुक्रवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “SAMHITA AVABODHINI – A National Conference on Inspiring Excellence in Samhita and Siddhanta” की मेजबानी करेगा। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम श्री राजेंद्र सेंटेनरी ऑडिटोरियम, JSS अस्पताल, एम.जी. रोड पर सुबह 10 बजे से शुरू होगा।

JSS महाविद्यापीठ के तत्वावधान में आयोजित यह सम्मेलन शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामी की 111वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और चिकित्सा छात्रों को एक मंच पर लाना है ताकि वैचारिक स्पष्टता को बढ़ावा दिया जा सके और शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं के साथ एकीकृत किया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा (Evidence-based medicine) में बदलने की एक गंभीर कोशिश है। आज के समय में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, तब 'संतर्पण' और 'अपतर्पण' जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक हो गया है।

"प्राचीन शास्त्रों का आधुनिक संदर्भ में अनुवाद ही आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी चिकित्सा पद्धति बना सकता है।"

वैज्ञानिक सत्रों के दौरान प्रख्यात विद्वानों द्वारा मुख्य व्याख्यान दिए जाएंगे। चर्चाओं का केंद्र पदार्थ अवधारणाओं की नैदानिक प्रासंगिकता, शास्त्र सिद्धांतों का चिकित्सीय अभ्यास में अनुवाद, और विमाना स्थान के वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विश्लेषण होगा। विशेष रूप से, समकालीन जीवनशैली विकारों के समाधान के लिए संतर्पण और अपतर्पण चिकित्सा के उपयोग पर गहन चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन में केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। स्नातक छात्रों के लिए एक ऑनलाइन पोस्टर प्रतियोगिता और स्नातकोत्तर (PG), पीएचडी शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के लिए ऑफलाइन वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

JSS महाविद्यापीठ ने दशकों से आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान का नेतृत्व किया है। शिवरात्रि राजेंद्र महास्वामी के दर्शन और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों ने दक्षिण भारत में पारंपरिक चिकित्सा के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सम्मेलन उसी विरासत को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।

क्या आप जानते हैं?: आयुर्वेद में 'संहिता' का अर्थ उन संकलित ग्रंथों से है जिनमें चिकित्सा के संपूर्ण ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संकलित किया गया है, जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: संहिता अवबोधिनी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों (संहिता और सिद्धांत) की वैचारिक स्पष्टता को मजबूत करना और उन्हें आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ जोड़ना है।

प्रश्न 2: इस कार्यक्रम में कौन भाग ले सकता है?
उत्तर: इसमें भारत भर के आयुर्वेद शिक्षाविद, शोधकर्ता, चिकित्सक और चिकित्सा छात्र भाग ले सकते हैं।