लद्दाख मैराथन के 13वें संस्करण की तैयारी में जुटे अनुभवी धावकों ने 17,982 फीट की ऊंचाई पर दौड़ने के लिए अपनी ट्रेनिंग रणनीतियों और मानसिक तैयारी के गुर साझा किए हैं।
- 13वें लद्दाख मैराथन में 122 किमी सिल्क रूट अल्ट्रा और 72 किमी खारदुंग ला चैलेंज सहित छह प्रमुख दौड़ शामिल हैं।
- भारत के 28 राज्यों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्थानों से 10,000 से अधिक प्रतिभागियों के आने की उम्मीद है।
- मुख्य प्रशिक्षण रणनीतियों में हाइपोक्सिक ट्रेनिंग, एलिवेशन सिमुलेशन और कठोर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल हैं।
लद्दाख मैराथन, जिसे "दुनिया की सबसे ऊंची मैराथन" के रूप में जाना जाता है, 10 से 13 सितंबर, 2026 तक अपने 13वें संस्करण के लिए तैयार है। हाई एल्टीट्यूड स्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह आयोजन केवल एक दौड़ नहीं है, बल्कि पृथ्वी के सबसे कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में मानवीय सहनशक्ति की एक परीक्षा है। ₹1 करोड़ के पुरस्कार पूल के साथ, यह आयोजन दुनिया भर के एथलीटों को आकर्षित कर रहा है।
इस प्रतियोगिता में छह अलग-अलग दौड़ शामिल हैं, जिनमें 5 किमी और 11.2 किमी की छोटी दौड़ से लेकर प्रसिद्ध खारदुंग ला चैलेंज (72 किमी) और अत्यंत कठिन सिल्क रूट अल्ट्रा (122 किमी) शामिल हैं, जो 17,982 फीट की चौंकाने वाली ऊंचाई तक पहुंचती है।
उच्च ऊंचाई पर सफलता का ब्लूप्रिंट
स्पर्श जैन और ओलिवर जोन्स जैसे अनुभवी धावकों का कहना है कि लद्दाख की तैयारी केवल समतल जमीन पर दौड़ने तक सीमित नहीं हो सकती। पूर्व क्रिकेटर स्पर्श जैन दिल्ली के फ्लाईओवरों पर एलिवेशन ट्रेनिंग और ऋषिकेश की पहाड़ियों में ट्रेनिंग का सहारा लेते हैं। उनका नियम तीन दिन दौड़ने और तीन दिन स्ट्रेंथ और मोबिलिटी ट्रेनिंग का संतुलन बनाना है।
बेंगलुरु स्थित वेल्श उद्यमी ओलिवर जोन्स अधिक वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करते हैं। पतली हवा का सामना करने के लिए, वह स्विमिंग पूल में हाइपोक्सिक ट्रेनिंग का उपयोग करते हैं ताकि कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के प्रति शरीर को अनुकूलित किया जा सके। इसके अलावा, वह नंदी हिल्स की चढ़ाई करते हैं और अपनी मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट की मदद लेते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि लद्दाख मैराथन एक स्थानीय खेल आयोजन से विकसित होकर अल्ट्रा-एंड्योरेंस एथलेटिक्स के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क बन गया है। 'अल्ट्रा' दूरी (42 किमी से अधिक) की ओर बढ़ता रुझान फिटनेस समुदाय में एक नए चलन को दर्शाता है, जहाँ लोग शारीरिक प्रदर्शन को साहसिक पर्यटन के साथ जोड़कर चरम चुनौतियों की तलाश कर रहे हैं।
"खारदुंग ला दौड़ भारत में किसी भी धावक के लिए अंतिम लक्ष्य की तरह है; इसे पूरा करने के लिए आपको अपने गहरे डर पर विजय पानी होगी।"
17,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर दौड़ने का मनोवैज्ञानिक प्रभाव शारीरिक प्रभाव जितना ही महत्वपूर्ण होता है। धावकों का कहना है कि यह अनुभव उन्हें विनम्र बनाता है, जिससे उन्हें एहसास होता है कि चाहे वे कितनी भी ट्रेनिंग कर लें, पहाड़ हमेशा सर्वोच्च सत्ता रहता है।
| दौड़ का नाम | दूरी | मुख्य चुनौती |
|---|---|---|
| सिल्क रूट अल्ट्रा | 122 किमी | अत्यधिक दूरी और ऑक्सीजन की कमी |
| खारदुंग ला चैलेंज | 72 किमी | खड़ी चढ़ाई और अत्यधिक ऊंचाई |
| फुल मैराथन | 42.195 किमी | ऊंचाई पर सहनशक्ति |
| हाफ मैराथन | 21.097 किमी | कम ऑक्सीजन में पेसिंग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: लद्दाख मैराथन के दौरान उच्चतम बिंदु क्या है?
उत्तर: सिल्क रूट अल्ट्रा और खारदुंग ला चैलेंज 17,982 फीट की ऊंचाई तक पहुंचते हैं।
प्रश्न: एक शुरुआती व्यक्ति उच्च ऊंचाई वाली दौड़ की तैयारी कैसे कर सकता है?
उत्तर: शुरुआती लोगों को धीरे-धीरे एरोबिक क्षमता बढ़ाने, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने और आयोजन से पहले मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में समय बिताकर शरीर को अनुकूलित करने पर ध्यान देना चाहिए।