छात्र आत्महत्याओं को रोकने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए, निमहंस (NIMHANS) ने कर्नाटक के 420 से अधिक सरकारी कॉलेजों में एक व्यापक ओरिएंटेशन प्रोग्राम चलाया है।
- 420 से अधिक सरकारी प्रथम श्रेणी कॉलेजों और 800 से अधिक प्रिंसिपलों को विशेष मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण दिया गया।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्र आत्महत्याओं को रोकना है।
- राज्यव्यापी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए 'अभय', 'बेलुगुतिराली बडुकु' और 'जीवनप्रीति' जैसे तीन क्षेत्रीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS) ने उच्च शिक्षा विभाग के साथ मिलकर कर्नाटक के विभिन्न जिलों में मानसिक स्वास्थ्य ओरिएंटेशन कार्यक्रमों की एक श्रृंखला सफलतापूर्वक आयोजित की है। यह पहल छात्रों के बीच आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य नीति के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए शुरू की गई है, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
इस अभियान का दायरा अत्यंत व्यापक है, जिसमें 420 से अधिक सरकारी प्रथम श्रेणी कॉलेजों को शामिल किया गया। कार्यक्रम के तहत 800 से अधिक प्रिंसिपलों को प्रशिक्षित किया गया ताकि वे छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को पहचान सकें और समय पर उचित प्रतिक्रिया दे सकें। इसमें संस्थागत सहायता प्रणालियों को मजबूत करने, टेली-सपोर्ट सेवाओं के उपयोग और डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों के महत्व पर जोर दिया गया।
क्षेत्रीय कार्यान्वयन रणनीति
राज्य के हर हिस्से तक पहुँचने के लिए, निमहंस ने तीन प्रमुख क्षेत्रीय सत्र आयोजित किए। पहला कार्यक्रम, 'अभय', 11 अगस्त को बेंगलुरु के निमहंस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया, जिसमें बेंगलुरु, मैसूरु, शिवमोगा और मंगलुरु के कॉलेजों के छात्रों ने भाग लिया। इसके बाद, 2 सितंबर को कलबुर्गी में 'बेलुगुतिराली बडुकु' सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें बल्लारी और अन्य जिलों के प्रिंसिपलों और छात्रों ने शिरकत की।
अंतिम सत्र, 'जीवनप्रीति – बालिगे स्फूर्ति', 7 सितंबर को धारवाड़ में संपन्न हुआ। इस सत्र ने हुब्बल्ली, हावेरी, गदग और अन्य जिलों के छात्रों को एक मंच पर लाया। निमहंस के विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों और तथ्यों पर चर्चा की और एक सहायक शैक्षिक वातावरण बनाने में शिक्षकों और संस्थागत नेताओं की भूमिका को रेखांकित किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों को सीधे कॉलेज प्रशासन के ढांचे में एकीकृत करना, प्रतिक्रियात्मक देखभाल के बजाय सक्रिय देखभाल की ओर एक बड़ा बदलाव है। प्रिंसिपलों और संकायों को सशक्त बनाकर, राज्य प्रभावी रूप से मानसिक स्वास्थ्य सहायता का विकेंद्रीकरण कर रहा है।
"अकादमिक दबाव से मनोवैज्ञानिक संकट तक का सफर बहुत छोटा हो सकता है; छात्र आत्महत्याओं को रोकने का एकमात्र स्थायी तरीका संस्थागत सतर्कता है।"
ओरिएंटेशन के अलावा, कार्यक्रम में डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को भी पेशेवर मदद मिल सके, जिससे ग्रामीण कॉलेजों और निमहंस जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच की दूरी कम होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: निमहंस के कॉलेज कार्यक्रमों का प्राथमिक लक्ष्य क्या था?
प्राथमिक लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य नीतियों के बारे में जागरूकता पैदा करना और कॉलेज प्रमुखों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को पहचानने और हल करने के लिए प्रशिक्षित करना था।
प्रश्न 2: इन सत्रों में कर्नाटक के किन क्षेत्रों को कवर किया गया?
इन सत्रों ने बेंगलुरु (अभय), कलबुर्गी (बेलुगुतिराली बडुकु) और धारवाड़ (जीवनप्रीति) के माध्यम से पूरे राज्य को कवर किया।