थिएटर कलाकार अपूर्वा आर्थर ने केरल कलामंडलम के इतिहास में पहली महिला छात्रा बनकर मिझावु वाद्ययंत्र का अरनगेट्टम (मंचन) किया है। उन्होंने समकालीन प्रदर्शन और शास्त्रीय अनुष्ठान परंपरा के बीच एक सेतु का निर्माण किया है।

  • अपूर्वा आर्थर केरल कलामंडलम के मिझावु विभाग की पहली महिला छात्रा बनीं जिन्होंने अपना अरनगेट्टम पूरा किया।
  • मिझावु एक तांबे का घड़े के आकार का वाद्ययंत्र है जिसका उपयोग कूडियाट्टम और कूथु कला रूपों में किया जाता है।
  • अपूर्वा की यात्रा समकालीन थिएटर से शुरू होकर शास्त्रीय जड़ों की खोज तक पहुँची है।

केरल के त्रिशूर स्थित केरल कलामंडलम के चेरुथुरुथी परिसर में 15 अगस्त की एक धुंधली सुबह ने एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा। थिएटर कलाकार अपूर्वा आर्थर ने इस 96 साल पुराने संस्थान के मिझावु विभाग में पहली महिला छात्रा के रूप में अपना 'अरनगेट्टम' (मंचन डेब्यू) पूरा किया। यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि एक ऐसे वाद्ययंत्र के क्षेत्र में लैंगिक बाधाओं को तोड़ने का प्रतीक है जिसे पारंपरिक रूप से पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है।

मिझावु एक विशाल, तांबे से बना घड़े के आकार का तालवाद्य है, जो मुख्य रूप से कूडियाट्टम और कूथु (जैसे नांगियारकूथु और चाकियारकूथु) का साथ देता है। इस वाद्ययंत्र की विशेषता यह है कि वादक कलाकार के पीछे बैठता है और मंच की गतिविधियों को देख नहीं पाता। इसलिए, वादक को कला रूप और उसके 'अट्टप्रकारम' (पाठ और अभिनय मैनुअल) की गहरी समझ होनी चाहिए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि अपूर्वा का यह कदम केवल संगीत सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समावेशिता का एक बड़ा उदाहरण है। मिझावु बजाने की मुद्रा, लकड़ी के केस (मिझावन्ना) में कदम रखना और उसके किनारे पर बैठना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, विशेषकर महिलाओं के लिए। अपूर्वा ने इन भौतिक और सामाजिक बाधाओं को पार कर यह सिद्ध किया है कि कला किसी लिंग या जाति की मोहताज नहीं होती।

"मिझावु ने मुझे खोजा, मैंने इसे नहीं; यह पहली ध्वनि सुनते ही प्यार हो गया था।" - अपूर्वा आर्थर

अपूर्वा की यात्रा 2011 में बेंगलुरु के रंगा शंकरा में शुरू हुई, जहाँ उन्होंने पहली बार इस वाद्ययंत्र को सुना। इसके बाद उन्होंने अडिशक्ति थिएटर आर्ट्स, ऑरोविले में प्रशिक्षण लिया। हालांकि, उन्होंने अपनी जड़ों और शास्त्रीय भाषा को समझने के लिए केरल कलामंडलम में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।

इस कहानी का एक और मार्मिक पहलू उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है। एक दलित ईसाई समुदाय से आने वाली अपूर्वा के पूर्वज चमड़े का काम करते थे। मिझावु की ऊपरी सतह चमड़े से बनी होती है, जिसे देखकर अपूर्वा कहती हैं कि उन्हें अपने पूर्वजों के कौशल और इस वाद्ययंत्र के बीच एक गहरा संबंध महसूस होता है।

क्या आप जानते हैं?: मिझावु वादक मंच पर कलाकार को देख नहीं सकते, इसलिए उन्हें पूरी प्रस्तुति की समय-सारणी और अभिनय की बारीकियों को कंठस्थ करना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मिझावु क्या है?
उत्तर: यह एक पारंपरिक तांबे का तालवाद्य है जिसका उपयोग केरल के शास्त्रीय नाटक कूडियाट्टम में किया जाता है।

प्रश्न 2: अरनगेट्टम का क्या अर्थ है?
उत्तर: अरनगेट्टम का अर्थ है किसी कलाकार का पहली बार सार्वजनिक रूप से मंच पर प्रदर्शन करना।