केरल के कन्नूर में एक महापाषाण (Megalithic) दफन स्थल पर केंद्रीय छेद वाला एक दुर्लभ पहिये जैसा पत्थर मिला है। यह खोज क्षेत्र में प्राचीन अंत्येष्टि अनुष्ठानों के बारे में नई संभावनाओं को जन्म देती है।

  • कन्नूर के कुझुम्मल-पेरलम में एक केंद्रीय छेद वाला दुर्लभ पहिये जैसा पत्थर मिला है।
  • यह खोज सात महापाषाण 'कुडाक्कल' (छाता पत्थरों) और एक 'हैट स्टोन' के पास हुई है।
  • केरल राज्य पुरातत्व विभाग इस स्थल के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार की तैयारी कर रहा है।

पुरातत्व विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में, केरल के कन्नूर स्थित कुझुम्मल-पेरलम में एक दुर्लभ पहिये जैसा पत्थर मिला है, जिसमें एक केंद्रीय छेद (post hole) मौजूद है। यह खोज इस क्षेत्र में पहले से मौजूद महापाषाण काल के दफन स्मारकों की श्रृंखला में एक रहस्यमयी कड़ी जोड़ती है।

यह पत्थर पेरीकमना नारायणन नंबूथिरी के आवासीय भूखंड पर पाया गया, जहाँ केरल राज्य पुरातत्व विभाग ने पहले ही सात 'कुडाक्कल' (छाता पत्थरों) का दस्तावेजीकरण किया है। सर्वेक्षण के दौरान एक 'हैट स्टोन' (Hat stone) भी मिला, जो इस क्षेत्र के एक प्राचीन कब्रिस्तान होने की पुष्टि करता है।

पझस्सी राजा पुरातत्व संग्रहालय के प्रभारी और पुरातत्वविद् के. कृष्णराज ने बताया कि छाता पत्थरों के साथ पहिये जैसे पत्थर का मिलना बेहद असामान्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थल के विरूपित होने के कारण पत्थर की सटीक स्थिति और उसके मूल उद्देश्य का निर्धारण करना वर्तमान में कठिन है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, छाता पत्थरों, हैट स्टोन्स और अब इस पहिये जैसे अवशेषों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि करीवेलुर महापाषाण संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र था। स्मारकों की यह विविधता लौह युग के दौरान सामाजिक पदानुक्रम या मृतक की स्थिति के आधार पर अलग-अलग दफन प्रणालियों का संकेत देती है।

"इस वस्तु की सटीक पहचान और पुरातात्विक महत्व को वर्तमान में निर्णायक रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता क्योंकि स्थल की अव्यवस्थित प्रकृति के कारण वस्तु का मूल स्थानिक संदर्भ स्पष्ट नहीं है।"

पुरातत्व विभाग अब इस स्थल के वैज्ञानिक अन्वेषण और जीर्णोद्धार की योजना बना रहा है। मुख्य उद्देश्य उन सात छाता पत्थरों को फिर से स्थापित करना है जो समय के साथ गिर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राचीन करीवेलुर के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल में महापाषाण संस्कृति की विशेषता दफन स्थलों को चिह्नित करने के लिए बड़े पत्थरों का उपयोग है। इनमें डोलमेन, सिस्ट और विशेष रूप से कुडाक्कल शामिल हैं, जो मुख्य रूप से त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में पाए जाते हैं। ये संरचनाएं हजारों साल पुरानी हैं और प्रारंभिक मानव बस्तियों की झलक पेश करती हैं।

स्मारक का प्रकारसंरचनाप्रमुख स्थान
कुडाक्कल (Kudakkal)4 खड़े पत्थर + गुंबददार ऊपरी पत्थरउत्तरी केरल (कन्नूर, कासरगोड)
हैट स्टोन (Hat Stone)मशरूम के आकार का पत्थरविभिन्न महापाषाण स्थल
पहिया पत्थर (Wheel Stone)केंद्रीय छेद वाला गोलाकार पत्थरदुर्लभ खोज
क्या आप जानते हैं?: कुडाक्कल केवल केरल क्षेत्र में पाए जाते हैं और इन्हें अक्सर परलोक में मृतक की सुरक्षा या सामाजिक स्थिति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कुडाक्कल क्या है?
कुडाक्कल एक महापाषाण कालीन छाता पत्थर है जिसमें चार ऊर्ध्वाधर पत्थर एक गोल ऊपरी पत्थर को सहारा देते हैं, जिसका उपयोग दफन चिह्न के रूप में किया जाता था।

प्रश्न 2: पहिये जैसा पत्थर दुर्लभ क्यों माना जा रहा है?
इसे दुर्लभ इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आमतौर पर छाता पत्थरों के साथ ऐसे अवशेष नहीं मिलते, जिससे इसकी कार्यप्रणाली शोध का विषय बन गई है।