बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया है कि एक कांस्टेबल ने विरोध प्रदर्शन के दौरान AK-47 से हवा में फायरिंग की, हालांकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने 'अत्यधिक संयम' बरता।

  • बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि एक कांस्टेबल ने AK-47 से 4 राउंड फायरिंग की।
  • पुलिस का दावा है कि AK-47 से कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन 9mm पिस्टल से फायरिंग हुई।
  • तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं; बैलिस्टिक जांच जारी है।
  • 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं।

नई दिल्ली: बिहार में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। बिहार पुलिस ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में यह स्वीकार किया है कि भीड़ में 'घिरे हुए' एक पुलिस कांस्टेबल ने अपनी AK-47 राइफल से हवा में चार राउंड फायरिंग की। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस विशेष हथियार से किसी को कोई चोट नहीं आई।

हलफनामे में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आया है। बिहार पुलिस ने माना कि AK-47 एक "प्लेटून-स्तरीय हथियार" है जिसका उपयोग केवल विशेष अभियानों में किया जाता है, न कि सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थितियों में। इसके बावजूद, पुलिस प्रशासन का तर्क है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए "अत्यधिक संयम" का परिचय दिया गया और किसी भी तरह के असंगत बल का प्रयोग नहीं किया गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य-ग्रेड हथियारों का उपयोग नागरिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान करना एक गंभीर प्रक्रियात्मक चूक है। जब पुलिस खुद मानती है कि AK-47 का उपयोग कानून-व्यवस्था की स्थितियों में नहीं होना चाहिए, तो इसका उपयोग करना मानवाधिकारों और पुलिस प्रोटोकॉल के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि एक अन्य अधिकारी ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल का इस्तेमाल किया। हलफनामे के अनुसार, तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं, हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये चोटें पिस्टल से लगी थीं या किसी अन्य हथियार से। वर्तमान में, हथियारों के प्रकार, फायरिंग की दूरी और कोण का पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच की जा रही है।

नागरिक विरोध प्रदर्शनों में स्वचालित हथियारों की मौजूदगी न केवल तनाव बढ़ाती है बल्कि पुलिस की प्रशिक्षण खामियों को भी उजागर करती है।

राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया और असामाजिक तत्वों ने पुलिस अधिकारियों पर जानबूझकर हमला किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया है।

छात्रों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए, पुलिस ने कहा है कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है। साथ ही, 18 वर्ष से कम उम्र के सभी हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने के आदेश दिए गए हैं।

क्या आप जानते हैं?: AK-47 अपनी उच्च मारक क्षमता और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है, और भारत में इसका उपयोग मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा के लिए किया जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या AK-47 से कोई घायल हुआ?
नहीं, बिहार पुलिस के अनुसार AK-47 से कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन 9mm पिस्टल फायरिंग के दौरान तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए।

प्रश्न 2: पुलिस ने छात्रों के लिए क्या निर्देश जारी किए हैं?
पुलिस ने 18 वर्ष से कम उम्र के छात्रों को रिहा करने और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं।