उत्तराखंड के चमोली में विष्णुगढ़-पिपलीकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में हुए सुरंग हादसे में दो और मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं, जिससे मरने वालों की संख्या 10 हो गई है।

  • चमोली में सुरंग हादसे में अब तक 10 मजदूरों की मौत की पुष्टि।
  • छत्तीसगढ़ और झारखंड के दो श्रमिकों के शव बरामद।
  • छह दिनों के गहन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सर्च ऑपरेशन समाप्त।
  • राज्य सरकार ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विष्णुगढ़-पिपलीकोट जलविद्युत परियोजना में हुए भीषण भूस्खलन के बाद चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में एक दुखद मोड़ आया है। मंगलवार को निर्माणाधीन सुरंग से दो और श्रमिकों के शव बरामद किए गए, जिससे इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई है।

राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के कमांडेंट अर्पण यादववंशी ने पुष्टि की कि लगभग 200 कर्मियों की भागीदारी वाला छह दिवसीय खोज और बचाव अभियान मंगलवार को समाप्त हो गया। यह हादसा 13 अगस्त को हुआ था, जब सुरंग के भीतर काम कर रहे 22 मजदूर अचानक भूस्खलन की चपेट में आ गए थे।

हादसे का विवरण और बचाव की चुनौतियां

अधिकारियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब श्रमिक सुरंग की लाइनिंग में कंक्रीट डालने का काम कर रहे थे। शुरुआत में 12 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन सात श्रमिकों के शव बरामद हुए थे। मंगलवार को मिले दो नए शवों की पहचान छत्तीसगढ़ के चेतन पोयम और झारखंड के लुकास टोपनो के रूप में हुई है। ये श्रमिक हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा तैनात किए गए थे।

बचाव कार्य के दौरान रेस्क्यू टीमों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सुरंग के भीतर पानी, मलबे और सीमेंट के जमा होने के साथ-साथ भारी मशीनरी और धातु के उपकरण भी कीचड़ में दब गए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डूबी हुई मशीनों को काटना पड़ा और पानी निकालने के लिए विशेष पंप स्थापित किए गए थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी विनाशकारी हो सकती है। यह घटना न केवल मानवीय क्षति को दर्शाती है, बल्कि कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों की जटिलता और जोखिमों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान भूस्खलन की चेतावनी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन न करना ऐसी त्रासदियों का मुख्य कारण बनता है।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सुरक्षा नियमों में कोई चूक हुई थी। इस ऑपरेशन में NDRF, ITBP, सेना, CISF और स्थानीय पुलिस ने मिलकर काम किया।

Did You Know?: हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, जिससे यहाँ निर्माण कार्य करना अत्यधिक जोखिम भरा होता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह हादसा कहाँ और कब हुआ था?
उत्तर: यह हादसा 13 अगस्त को उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगढ़-पिपलीकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग में हुआ था।

प्रश्न 2: मृतकों की पहचान क्या है?
उत्तर: अब तक 10 लोगों की मौत हुई है, जिनमें हाल ही में बरामद छत्तीसगढ़ के चेतन पोयम और झारखंड के लुकास टोपनो शामिल हैं।