आंध्र प्रदेश के परिवहन मंत्री एम. रामप्रसाद रेड्डी ने विधानसभा में घोषणा की कि निजी स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जा रहे हैं। सरकार केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगा रही है।

  • निजी स्लीपर बसों के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 128 का कड़ाई से पालन अनिवार्य।
  • जुलाई 2026 तक 9,003 मामले दर्ज और ₹9.79 करोड़ का जुर्माना वसूला गया।
  • राज्य में कुल 851 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं, जिनमें से 835 निजी क्षेत्र की हैं।

आंध्र प्रदेश की विधानसभा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सत्र के दौरान, परिवहन मंत्री एम. रामप्रसाद रेड्डी ने निजी स्लीपर बसों में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि पर सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस गंभीर समस्या की बारीकी से निगरानी कर रही है और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

नेल्लोर ग्रामीण के विधायक कोतमरेड्डी श्रीधर रेड्डी द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए, मंत्री ने बताया कि सरकार ने पंजीकरण अधिकारियों को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 128 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। यह नियम बसों के निर्माण, सुरक्षा उपकरणों, संरचनात्मक अखंडता, लाइटिंग, इंटीरियर फिटिंग और यात्री बैठने के मानकों को नियंत्रित करता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि निजी स्लीपर बसों की बढ़ती संख्या के साथ सुरक्षा मानकों में ढिलाई एक बड़ा खतरा बन गई है। चूंकि राज्य में पंजीकृत 851 स्लीपर बसों में से 835 निजी क्षेत्र की हैं, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निजी ऑपरेटरों पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है।

सुरक्षा मानकों का उल्लंघन न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।

सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, परिवहन विभाग ने प्रवर्तन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। वर्ष 2025 में कुल 13,724 मामले दर्ज किए गए थे और ₹11.96 करोड़ का जुर्माना वसूला गया था। वहीं, जुलाई 2026 तक 9,003 मामले दर्ज कर ₹9.79 करोड़ की वसूली की जा चुकी है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में निजी स्लीपर बसों का चलन पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है। हालांकि इसने यात्रा को आरामदायक बनाया है, लेकिन शॉर्ट सर्किट और घटिया निर्माण सामग्री के कारण आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। इसी कारण से केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर सुरक्षा मानकों को अधिक सख्त बनाया है।

विधायक श्रीधर रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि लगभग 90% दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर और भी भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि ऑपरेटरों को जवाबदेह बनाया जा सके।

Did You Know?: नियम 128 के तहत, बसों के दरवाजे, रियर-व्यू मिरर और आंतरिक फिटिंग के सटीक आयाम निर्धारित होते हैं ताकि आपातकाल में निकासी आसान हो सके।

Frequently Asked Questions

1. नियम 128 क्या सुनिश्चित करता है?
यह नियम बसों के निर्माण, सुरक्षा उपकरणों, लाइटिंग और संरचनात्मक मजबूती के मानकों को सुनिश्चित करता है।

2. राज्य में कितनी निजी स्लीपर बसें हैं?
आंध्र प्रदेश में कुल 835 निजी स्लीपर बसें पंजीकृत हैं।