चेन्नई में आयोजित रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन में आर्किटेक्चर छात्रों ने भारत के बढ़ते शहरी ताप को कम करने के लिए 'वर्टिकल फॉरेस्ट सिटीज' का प्रस्ताव रखा है। यह मॉडल गगनचुंबी इमारतों को जैव विविधता गलियारों और शहरी खेती के साथ जोड़ने पर केंद्रित है।

मुख्य बातें

  • भारत के शहरों में बढ़ते तापमान को कम करने के लिए 'वर्टिकल फॉरेस्ट' मॉडल की आवश्यकता है।
  • चेन्नई में वनस्पति का स्तर 25% (2014) से गिरकर 10% (2024) हो गया है।
  • भविष्य के शहरी विकास में वास्तुकला और पारिस्थितिकी को एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखा जाना चाहिए।
  • ऐतिहासिक जल निकायों (जैसे मंदिर के तालाब) का पुनरुद्धार जल संकट का समाधान हो सकता है।

चेन्नई में आयोजित रियल एस्टेट और शहरी बुनियादी ढांचा शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान, भविष्य के शहरी नियोजन के लिए एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। आर्किटेक्चर छात्रा सुभाप्रदा ने तर्क दिया कि भारत के बढ़ते 'कंक्रीट के जंगलों' को बचाने के लिए हमें 'वर्टिकल फॉरेस्ट सिटीज' की तत्काल आवश्यकता है।

डेटा के अनुसार, चेन्नई जैसे शहरों में निर्माण क्षेत्र का विस्तार तेजी से हुआ है, जिससे प्राकृतिक हरियाली कम हो गई है। वर्ष 2014 में चेन्नई की वनस्पति का स्तर 25% था, जो 2024 तक घटकर मात्र 10% रह गया है। इसके विपरीत, निर्मित क्षेत्र (built-up area) 36% से बढ़कर 67% हो गया है, जिससे शहरों में 'हीट स्पॉट्स' यानी अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्र बन रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि शहरीकरण की वर्तमान गति पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ रही है। सुभाप्रदा का प्रस्ताव है कि गगनचुंबी इमारतों को केवल कंक्रीट के ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि शहरी खेती, कार्बन सोखने (carbon sequestration) और शीतलन परिदृश्य (cooling landscapes) के एक हिस्से के रूप में डिजाइन किया जाना चाहिए।

भविष्य के विकास में हरियाली को केवल एक 'सुविधा' नहीं, बल्कि वास्तुकला और पारिस्थितिकी का एक एकीकृत हिस्सा होना चाहिए।

वहीं, छात्र एल्ड्रिच बेनेट ने 'वाटर-पॉजिटिव सिटीज' के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने चेन्नई के ऐतिहासिक मंदिर के तालाबों और नहरों के पुनरुद्धार का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि कैसे 300 साल पुराने कृष्णप्पा टैंक जैसे जल निकायों का संरक्षण करके हम बाढ़ नियंत्रण और भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) सुनिश्चित कर सकते हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: वर्तमान बनाम प्रस्तावित शहरी मॉडल

विशेषतावर्तमान शहरी मॉडलप्रस्तावित वर्टिकल फॉरेस्ट मॉडल
हरियाली का स्वरूपसीमित पार्क और खुले स्थानगगनचुंबी इमारतों के साथ एकीकृत वर्टिकल गार्डन
तापमान नियंत्रणकंक्रीट के कारण बढ़ता हीट आइलैंड प्रभावप्राकृतिक शीतलन और कार्बन सोखने की क्षमता
जल प्रबंधनअपर्याप्त निकासी और भूजल की कमीपारंपरिक जल निकायों और वर्षा जल संचयन का एकीकरण
क्या आप जानते हैं?: वर्टिकल फॉरेस्ट न केवल तापमान कम करते हैं, बल्कि ये शहरों के भीतर पक्षियों और कीटों के लिए प्राकृतिक गलियारे भी बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. वर्टिकल फॉरेस्ट सिटी क्या है?
यह एक ऐसा शहरी मॉडल है जहाँ गगनचुंबी इमारतों की दीवारों और छतों पर सघन वनस्पति उगाई जाती है ताकि पारिस्थितिकी तंत्र को जीवित रखा जा सके।

2. चेन्नई में हरियाली कम होने का क्या कारण है?
तेजी से होता शहरीकरण और निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक वनस्पति का स्थान कंक्रीट के ढांचों ने ले लिया है।