तमिलनाडु में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए NHAI 31 राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वचालित स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम स्थापित करने जा रहा है। यह नई तकनीक रात के समय ड्राइविंग को सुरक्षित बनाएगी और रखरखाव को आसान बनाएगी।

मुख्य बातें

  • NHAI ने 31 राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्मार्ट लाइटिंग के लिए टेंडर जारी किए हैं।
  • पुरानी मैनुअल लाइटिंग की जगह अब पूरी तरह से स्वचालित (Automated) सिस्टम आएगा।
  • IoT तकनीक के जरिए खराब बल्बों की पहचान तुरंत की जा सकेगी।
  • परियोजना के अक्टूबर से शुरू होने और एक साल में पूरा होने की उम्मीद है।

तमिलनाडु के उत्तरी और मध्य भागों में स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर रात के समय सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राज्य के 31 प्रमुख राजमार्गों पर आधुनिक 'स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम' स्थापित करने के लिए निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की हैं।

वर्तमान में, इन राजमार्गों पर लाइटिंग व्यवस्था मैन्युअल रूप से संचालित होती है, जिससे समय पर रोशनी चालू करने या खराब बल्बों को बदलने में देरी होती है। नई प्रणाली के तहत, लाइटें सूर्यास्त के समय अपने आप जल जाएंगी और सूर्योदय तक चालू रहेंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौसम के अनुसार इनका समय अपने आप बदल जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत भी होगी।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि राजमार्गों पर अपर्याप्त रोशनी दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। स्मार्ट लाइटिंग न केवल दृश्यता (Visibility) में सुधार करेगी, बल्कि Internet of Things (IoT) तकनीक का उपयोग करके रखरखाव को भी क्रांतिकारी बना देगी। अधिकारी अब ऑनलाइन देख सकेंगे कि कौन सा बल्ब या स्विच काम नहीं कर रहा है, जिससे मरम्मत कार्य में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

स्मार्ट लाइटिंग तकनीक न केवल दुर्घटनाओं को कम करेगी, बल्कि बुनियादी ढांचे के रखरखाव के खर्च को भी काफी हद तक घटा देगी।

यह निर्णय चेन्नई-तिरुचि राष्ट्रीय राजमार्ग पर तामबरम से तिंडीवनम तक किए गए सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद लिया गया है। उस 95-किमी के खंड पर IoT-आधारित लाइटिंग के बाद सुरक्षा और दृश्यता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में राजमार्गों का आधुनिकीकरण पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। पहले, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में राजमार्गों पर रोशनी केवल चुनिंदा स्थानों पर होती थी, लेकिन अब डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बुनियादी ढांचे को तकनीकी रूप से उन्नत किया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: IoT आधारित स्मार्ट लाइटें सेंसर का उपयोग करती हैं जो केवल आवश्यकता होने पर ही पूरी चमक प्रदान करती हैं, जिससे बिजली की भारी बचत होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. यह नई लाइटिंग प्रणाली कब तक पूरी हो जाएगी?
अधिकारियों के अनुसार, काम अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है और ठेकेदार को स्थापना और परीक्षण पूरा करने के लिए एक वर्ष का समय दिया जाएगा।

2. क्या यह केवल बड़े राजमार्गों पर लागू होगा?
वर्तमान योजना में 31 विशिष्ट राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं, लेकिन पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जा सकता है।