उपग्रह चित्रों ने दिखाया कि ईरान ने पर्चिन सैन्य परिसर में स्थित तलघन‑2 भूमिगत नाभिकीय सुविधा की मरम्मत शुरू कर दी है। यह कदम यूएस‑ईरान के बीच हालिया शांति समझौते की स्थिरता को चुनौती देता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- उपग्रह चित्रों से तलघन‑2 सुविधा में स्थायी पुनर्निर्माण कार्य जारी
- ईरान ने बमबारी के बाद अस्थायी मरम्मत से स्थायी संरचना की ओर कदम बढ़ाया
- यह विकास यूएस‑ईरान के समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है
जून‑जुलाई 2026 के बीच ली गई उपग्रह छवियों में पर्चिन सैन्य परिसर के भीतर स्थित तलघन‑2 भूमिगत नाभिकीय सुविधा पर नई निर्माण गतिविधियों का स्पष्ट प्रमाण मिला है। इस सुविधा को 2026 में यूएस के दो क्रमिक बमबारी अभियानों में काफी क्षति पहुँची थी, जिसमें मुख्य भूमिगत बंकर और उससे जुड़े परीक्षण कक्ष शामिल थे।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
ईरान की नाभिकीय कार्यक्रम पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव का इतिहास दशकों पुराना है। 2015 में जियोनाईड समझौते के बाद भी, ईरान ने अपने सैन्य‑नाभिकीय क्षमताओं को जारी रखा, जिससे 2023‑2024 में तनाव बढ़ा। 2026 में अमेरिकी बलों ने पर्चिन परिसर में दो बमबारी करके मुख्य बंकर को नष्ट कर दिया, जिससे इराकी‑अमेरिकी संबंधों में अस्थायी शांति का झटका लगा।
उपग्रह छवियों में दिखी नई गतिविधियाँ
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) द्वारा विश्लेषित छवियों में दिखता है कि 12 जून को बम प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से मिट्टी से ढका गया, जबकि 18 जून तक ट्रकों और बड़े क्रेन की उपस्थिति ने पुनर्निर्माण कार्य की शुरुआत का संकेत दिया। 22 जून और 7 जुलाई की छवियों में कंक्रीट डालने, स्टील रीबार जाल स्थापित करने और अंततः पूरी संरचना को पुनः कंक्रीट से सील करने की प्रगति स्पष्ट है।
राजनीतिक प्रभाव और संभावित परिणाम
यह विकास यूएस‑ईरान के जून 2024 में हस्ताक्षरित मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को सीधे चुनौती देता है, जिसमें ईरान ने सैन्य‑नाभिकीय अनुसंधान को रोकने का वचन दिया था। यदि ईरान इस सुविधा को पूरी तरह पुनः स्थापित करता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को अस्थिर कर सकता है और इज़राइल तथा अन्य मध्य‑पूर्वी देशों के साथ तनाव को बढ़ा सकता है। साथ ही, यह अमेरिकी विदेश नीति के लिए नई चुनौतियों का परिचायक बन सकता है, जिससे संभावित अतिरिक्त सैन्य उपायों की सम्भावना बढ़ती है।
भविष्य की दिशा
अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को इस पुनर्निर्माण पर कड़ी नज़र रखनी होगी। यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो फिर से आर्थिक प्रतिबंधों या सैन्य प्रतिक्रिया की संभावना बनी रहेगी। इस बीच, कूटनीतिक चैनलों से पुनः वार्ता की संभावना भी खोली जा सकती है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों की रणनीतिक धारणाओं में बदलाव आवश्यक होगा।