संयुक्त राज्य ने बुधवार को ईरान के तट रक्षा और मिसाइल बुनियादी ढाँचे पर नई हवाई हमले शुरू किए, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास तनाव में वृद्धि हुई। ईरानी मीडिया ने दक्षिणी क्षेत्रों में विस्फोटों की रिपोर्ट की, जबकि ईरानी संसद स्पीकर ने इस संघर्ष को अमेरिका के साथ एक अस्तित्वगत युद्ध बताया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- US ने होर्मुज़ के निकट ईरान के सैन्य ठिकानों पर पांचवीं लगातार हवाई हमला किया
- ईरान में कई स्थानों पर विस्फोटों की रिपोर्ट, लेकिन आधिकारिक नुकसान का आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं
- संघर्ष को ईरान के संसद स्पीकर ने अस्तित्वगत युद्ध बताया, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा
संयुक्त राज्य अमेरिका ने बुधवार को ईरान के तट रक्षा प्रणाली और मिसाइल बुनियादी ढाँचे को लक्ष्य बनाते हुए नई हवाई हमला श्रृंखला शुरू की। यह पाँचवीं लगातार दिन है जिसमें अमेरिकी सेनाएँ ईरान के खिलाफ हवाई कार्रवाई कर रही हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित रणनीतिक बिंदु पर तनाव की स्थिति और तेज़ हो गई है।
घटना का विस्तृत विवरण
US सेंट्रल कमांड (Centcom) ने अपने आधिकारिक X पोस्ट में बताया कि 15:00 ईएसटी (ET) पर अतिरिक्त हवाई हमले शुरू किए गए, जिनका उद्देश्य "इरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना" था, जो इस जलडमरूमध्य में गुजरते जहाज़ों को खतरे में डालती थीं। पूर्व में ही सुबह 6:00 ईएसटी पर ग्रेटर टुंब द्वीप पर एक 90 मिनट की हवाई कार्रवाई की गई थी, जहाँ तटीय रक्षा प्रणाली और क्रूज मिसाइल स्टोरेज साइट को नष्ट किया गया।
ईरान में विस्फोटों की रिपोर्ट
ईरानी मीडिया, विशेषकर मेहर न्यूज़ एजेंसी, ने बंदर-अब्बास के निकट, चाबा हार और अहवाज़ में कई विस्फोटों की सूचना दी। हालांकि, टेहरान ने अभी तक किसी आधिकारिक नुकसान या मानवीय हताहत की पुष्टि नहीं की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अटकलबाज़ी जारी है।
भौगोलिक और आर्थिक महत्व
होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग मार्गों में से एक है, जहाँ वैश्विक तेल और गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है। इस जलडमरूमध्य की बंदी से विश्व तेल बाजार में उछाल आया है, और ब्रेंट क्रूड की कीमत बुधवार को $84.95 प्रति बैरल के एक महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गई। इस कारण से क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएँ
ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य वार्ता प्रतिनिधि मोहम्मद बाकर कलिबाफ ने इस संघर्ष को "अवश्यक और अस्तित्वगत युद्ध" कहा, जबकि ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड ने क्षेत्रीय ऊर्जा निर्यात मार्गों को लक्ष्य बनाने की चेतावनी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ईरान को वार्ता वापस लाने के लिए दबाव बढ़ाया, कहा कि अगर इरान नहीं मानेगा तो ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को भी निशाना बनाया जाएगा। इस प्रकार, दोनों पक्षों के बीच तनाव का स्तर और बढ़ने की संभावना है, जिससे मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।