संयुक्त राज्य ने बुधवार को ईरान के खिलाफ दूसरी सटीक हवाई हमले किए, जिसमें होर्मुज जलमार्ग में शिपिंग को खतरे में डालने वाले सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया। इस कार्रवाई से दो देशों के बीच तनाव में नई वृद्धि हुई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तीसरे दिन दो बार अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए
  • होरमुज जलमार्ग को खतरे में डालने वाले इरानी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया
  • हमले का निर्देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दिया, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को प्रमुखता दी गई

बुधवार को संयुक्त राज्य ने ईरान के खिलाफ अपनी दूसरी हवाई कार्रवाई शुरू की, जिसमें होर्मुज जलमार्ग के पास स्थित कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को लक्षित किया गया। अमेरिकी सेना के अनुसार, ये ठिकाने वह क्षमताएं रखते थे जो इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में आवागमन करने वाले व्यापारिक जहाजों को बाधित करने की कोशिश में उपयोग होते थे।

पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व

होरमुज जलमार्ग, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, विश्व व्यापार में लगभग पाँच प्रतिशत तेल के प्रवाह का मुख्य मार्ग है। इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय तनाव रहा है, विशेषकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच। 2019 में ईरान द्वारा इस जलमार्ग में जहाजों को चेतावनी देने वाले हमलों ने पहले भी बड़ी बहस को जन्म दिया था।

अमेरिकी कार्रवाई का विवरण

संयुक्त राज्य की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, ऑपरेशन दोपहर 3 बजे ईस्टर्न टाइम (ET) पर शुरू हुआ और कई इरानी बुनियादी ढांचे को लक्षित किया गया। इन लक्ष्यों में रडार स्टेशन, रॉकेट लॉन्च साइट और समुद्री रक्षा प्रणाली शामिल थीं, जो विशेष रूप से शिपिंग को बाधित करने वाले क्षमताओं से जुड़े थे। अमेरिकी सैन्य ने कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर की गई, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित रखना और ईरान को उसकी धमकी भरी नीतियों से रोकना था।

भविष्य की संभावनाएँ और क्षेत्रीय प्रभाव

यह दूसरा हमला, पहले वाले के साथ मिलकर, दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊँचाई पर ले गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान प्रतिक्रिया में समान या अधिक तीव्रता वाला कदम उठाता है, तो मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य टकराव की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही, इस तरह की कार्रवाई तेल की कीमतों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून पर भी असर डाल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि वे शांति के रास्ते अपनाएँ और जलमार्ग की सुरक्षा को निरंतरता प्रदान करें। जबकि इरान ने इस हमले को अपने संप्रभु अधिकार का उल्लंघन कहा, कई यूरोपीय देशों ने अमेरिकी कदम को “आवश्यक” बताया, जिससे इस मुद्दे में विभाजन स्पष्ट हो रहा है।