भारत‑ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने भारत के 2047 तक 100 GW लक्ष्य को तेज किया। यह कदम दोनों देशों के सामरिक हितों को जोड़ते हुए वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर नया आयाम स्थापित करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम निर्यात करने की स्वीकृति दी।
- यह भारत के 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता लक्ष्य को तेज करेगा।
- सुरक्षा एवं निगरानी के लिए द्विपक्षीय समझौता अंतिम रूप मिला।
9 जुलाई को मेलबर्न में आयोजित भारत‑ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को रेखांकित किया, परंतु सबसे उल्लेखनीय बात यूरेनियम आपूर्ति पर दो देशों के बीच नया समझौता था। यह समझौता न केवल ऊर्जा‑सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत‑ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को नई प्रासंगिकता देता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परम्परागत रूप से ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम केवल उन देशों को निर्यात किया है जो परमाणु निरस्त्रीकरण समझौते (NPT) के हस्ताक्षरकर्ता हैं। 2008 में भारत‑अमेरिका परमाणु समझौते ने भारत को इस प्रतिबंध से बाहर निकलाया, परंतु ऑस्ट्रेलिया ने तब भी अपनी नीति में संशय बरकरार रखा। भारत ने 2009 में अंतर्राष्ट्रीय एटॉमिक ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ अतिरिक्त प्रोटोकॉल (AP) अपनाया, जिससे उसकी नागरिक और सैन्य परमाणु सुविधाओं को अलग‑अलग किया गया। यह कदम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत की गैर‑विस्फोटक विश्वसनीयता को सिद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण था।
समझौते की प्रक्रिया
2015 में दो‑पक्षीय परमाणु सहयोग समझौता हुआ, परंतु व्यावहारिक कार्यान्वयन में बाधाएँ आईं। ऑस्ट्रेलिया‑भारत प्रशासनिक व्यवस्था (AA) को स्थापित करने में यूरेनियम के ट्रैकिंग, लेखांकन और रिपोर्टिंग के मानकों पर चर्चा हुई। दो साल के कठिन वार्ता‑परिणामस्वरूप इन मुद्दों का समाधान हुआ, जिससे अब वाणिज्यिक अनुबंधों की राह खुल गई है।
भारत की परमाणु ऊर्जा दृष्टि
भारत ने 2026 तक स्थापित परमाणु क्षमता को 8.78 GW से बढ़ाकर 2047 तक 100 GW करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो‑पहलू रणनीति अपनाई जा रही है: बड़े 700 MWe इंडिजेनस रिएक्टरों का “फ़्लीट मोड” विस्तार और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) का विकास, जो स्टील, सीमेंट और एआई डेटा‑सेंटर जैसे ऊर्जा‑गहन उद्योगों को कम‑कार्बन ऊर्जा प्रदान करेंगे। शांति अधिनियम (SHANTI Act) के तहत निजी क्षेत्र को भागीदारी की अनुमति मिलने से निर्माण‑काल में गति आएगी, जबकि रणनीतिक ईंधन‑चक्र के संवेदनशील भाग सरकार के नियंत्रण में रहेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
ऑस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार‑धारक में से एक है, जो वैश्विक आपूर्ति में लगभग एक‑तिहाई हिस्सा रखता है। ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की उच्च गुणवत्ता भारतीय कम‑ग्रेड खनिज से कम अन्वेषण लागत और कम पर्यावरणीय प्रभाव प्रदान करेगी। यह न केवल भारत की ऊर्जा‑सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के मुकाबले में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।