UNICEF और CII ने चेन्नई में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में बच्चों के कल्याण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- UNICEF और CII ने बच्चों के विकास के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा करने हेतु चेन्नई में एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया।
- विशेषज्ञों ने कहा कि बिना बच्चों के कल्याण के स्थायी आर्थिक विकास संभव नहीं है।
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से मानव पूंजी में निवेश करने पर जोर दिया गया।
- तमिलनाडु की ट्रिलियन-डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दृष्टि में बच्चों का विकास एक रणनीतिक निवेश है।
चेन्नई में आयोजित एक उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन में यूनिसेफ (UNICEF) और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके कल्याण को बढ़ावा देने में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर गहन विचार-विमर्श किया। 'बच्चों में निवेश क्यों करें?' (Why Invest in Children?) विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राष्ट्र की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास उसके बच्चों के भविष्य पर निर्भर करता है।
मानव पूंजी और आर्थिक विकास का संबंध
सम्मेलन के दौरान यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे (Cynthia McCaffrey) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु रखा। उन्होंने कहा, "बच्चों के बिना कोई भी निरंतर आर्थिक विकास प्राप्त नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से सरकार, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और यूनिसेफ जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम करने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने नवाचार और ज्ञान नेटवर्क के माध्यम से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
निजी क्षेत्र की भूमिका और CSR का विस्तार
CII एसआर टास्क फोर्स के अध्यक्ष एस. नरसिम्हन (S. Narasimhan) ने उद्योग जगत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि CII की सदस्य कंपनियां बाल विकास में भारी मात्रा में CSR निवेश करती हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल धन तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि निजी क्षेत्र अपने मानव संसाधन (Manpower) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के माध्यम से भी इन परियोजनाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे सकता है।
तमिलनाडु का भविष्य और रणनीतिक निवेश
चर्चा के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि जैसे-जैसे तमिलनाडु एक ट्रिलियन-डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, बच्चों के विकास में निवेश करना राज्य की भविष्य की मानव पूंजी, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और समावेशी विकास के लिए सबसे रणनीतिक निवेशों में से एक बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आज बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, तो यह भविष्य के कार्यबल को अधिक कुशल और सक्षम बनाएगा।