चित्तूर-तमिलनाडु सीमा पर महीनों से आतंक मचा रहे एक जंगली हाथी को वन विभाग ने एक जटिल ऑपरेशन के जरिए सफलतापूर्वक पकड़ लिया है। इस हाथी ने न केवल फसलों को नुकसान पहुँचाया, बल्कि एक वन अधिकारी को घायल भी किया था।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • चित्तूर-तमिलनाडु सीमा पर एक उप-वयस्क (sub-adult) हाथी को सफलतापूर्वक पकड़ा गया।
  • ऑपरेशन में 5 प्रशिक्षित कुंकी हाथियों और 50 वन कर्मियों ने भाग लिया।
  • हाथी ने पलामनेर शहर में 3,000 लोगों की भीड़ जमा कर दी थी और एक अधिकारी को घायल किया था।
  • पकड़े गए हाथी को अब मुसलीमाडुगु हाथी कैंप में स्थानांतरित कर दिया गया है।

चित्तूर, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पिछले कई महीनों से ग्रामीणों और राहगीरों के लिए काल बना एक जंगली हाथी आखिरकार वन विभाग के शिकंजे में आ गया है। बुधवार शाम को चलाए गए एक बेहद जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद, 5 प्रशिक्षित कुंकी हाथियों और लगभग 50 वन कर्मियों की टीम ने इस उप-वयस्क (sub-adult) हाथी को सफलतापूर्वक काबू कर लिया।

तबाही का लंबा सफर

यह हाथी पिछले लगभग एक साल से पलामनेर, बंगारुपलेम, गुडीपाला और चित्तूर मंडलों के गांवों में आतंक मचा रहा था। इसने न केवल किसानों की फसलों और बागवानी को भारी नुकसान पहुँचाया, बल्कि मवेशियों पर भी हमले किए। सबसे खतरनाक स्थिति तब पैदा हुई जब इस हाथी ने मोघिली घाट हाईवे (NH-4) पर बार-बार आवाजाही शुरू कर दी, जिससे मोटर वाहन चालकों की जान को खतरा पैदा हो गया।

पलामनेर में मची थी अफरा-तफरी

जिला वन अधिकारी (DFO) जी. सुब्बरज के अनुसार, स्थिति तब बेकाबू हो गई जब हाथी ने पलामनेर शहर के भीतर प्रवेश कर लिया, जिससे लगभग 3,000 लोगों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में दहशत फैल गई। इस दौरान एक वन अनुभाग अधिकारी (Forest Section Officer) पर भी हमला हुआ, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हाथी के अनियंत्रित व्यवहार को देखते हुए, वन विभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत इसे पकड़ने की अनुमति प्राप्त की थी।

वैज्ञानिक और रणनीतिक ऑपरेशन

यह ऑपरेशन 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' के राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित किया गया था। इसमें जोखिम मूल्यांकन, मॉक ड्रिल और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय शामिल था। एसवी ज़ू पार्क (Palamaner) और कुप्पम कैंपों से लाए गए कुंकी हाथियों ने इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महावतों के अनुसार, शुरुआत में हाथी काफी आक्रामक था, लेकिन कुंकी हाथियों ने उसे घेरकर नियंत्रण में ले लिया।

अगला कदम: पुनर्वास और निगरानी

हाथी को अब मुसलीमाडुगु हाथी कैंप में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक हाथी की व्यवहार संबंधी जांच और पशु चिकित्सा निगरानी की जाएगी। भविष्य में इसके प्रबंधन का निर्णय वन्यजीव संरक्षण प्रोटोकॉल और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा।