ईरान की कट्टरपंथी बयानबाजी के पीछे छिपी वास्तविकता यह है कि उसका मुख्य लक्ष्य विचारधारा नहीं, बल्कि शासन का अस्तित्व बचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता बचाने के लिए ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ समझौता कर सकता है।
मुख्य बातें
- ईरान की नीति विचारधारा से नहीं, बल्कि 'शासन के अस्तित्व' (Regime Survival) से संचालित होती है।
- संविधान का अनुच्छेद 112 शासन के हित में धार्मिक नियमों से समझौता करने की अनुमति देता है।
- इतिहास गवाह है कि संकट के समय ईरान ने अमेरिका के साथ गुप्त सौदे भी किए हैं।
तेहरान से आ रही शत्रुतापूर्ण बयानबाजी और प्रतिशोध की ललकार के बावजूद, एक बड़ा सवाल बना हुआ है: क्या ईरान वास्तव में साम्राज्यवाद विरोधी है? अलबिजरा के विश्लेषण और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का व्यवहार किसी अटूट विचारधारा से नहीं, बल्कि अपनी सत्ता को सुरक्षित रखने की गणना से प्रेरित है।
विचारधारा बनाम अस्तित्व का सिद्धांत
ईरानी संविधान और उसके हालिया इतिहास को देखने पर पता चलता है कि इस्लामी गणराज्य केवल विचारधारा से नहीं चलता। 1989 के संवैधानिक संशोधनों ने 'परिषद फॉर डिसर्निंग द एक्सपीडिएंसी ऑफ द सिस्टम' (Article 112) को एक स्थायी स्थान दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि शासन के अस्तित्व पर खतरा मंडराता है, तो धार्मिक कानूनों को दरकिनार किया जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि ईरान की 'साम्राज्यवाद विरोधी' नीति सार्वभौमिक नहीं बल्कि स्थितिजन्य है। वह केवल तब विरोध करता है जब उसे खतरा महसूस होता है। जब बात अपने सुरक्षा हितों की आती है, तो वह लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों का उपयोग केवल अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए करता है।
ईरान के लिए साम्राज्यवाद विरोध केवल एक सुरक्षा कवच है, और सुरक्षा कवच को जरूरत पड़ने पर ढीला किया जा सकता है।
इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ ईरान ने अपनी कट्टरता को किनारे रखा। 1988 में इराक के साथ युद्ध विराम स्वीकार करना हो या 'ईरान-कोंट्रा' मामले के दौरान अमेरिका के साथ गुप्त लेनदेन, ईरान ने हमेशा दिखाया है कि 'अस्तित्व' सबसे ऊपर है।
ऐतिहासिक तुलना: ईरान की रणनीति
| अवसर | ईरान का रुख | परिणाम |
|---|---|---|
| 1988 इराक युद्ध | कट्टरपंथी रुख से समझौता | युद्ध विराम स्वीकार किया |
| ईरान-कोंट्रा मामला | अमेरिका के साथ गुप्त वार्ता | हथियारों का लेनदेन |
| वर्तमान संघर्ष | प्रतिशोध की धमकी | सत्ता बचाने के लिए समझौता संभव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या ईरान अमेरिका के साथ समझौता कर सकता है?
हाँ, क्योंकि ईरान की प्राथमिकता विचारधारा नहीं बल्कि शासन का अस्तित्व बचाना है।
2. अनुच्छेद 112 क्या है?
यह एक संवैधानिक निकाय है जो शासन के हित में धार्मिक कानूनों से समझौता करने की अनुमति देता है।