जापान के क्राउन प्रिंस अकिशिनो ने केवल पुरुषों के लिए शाही उत्तराधिकार के कानून पर अपनी अनिश्चितता व्यक्त की है, जिससे देश में लिंग समानता और राजशाही के भविष्य पर बहस छिड़ गई है।

मुख्य बातें

  • क्राउन प्रिंस अकिशिनो ने पुरुष-मात्र उत्तराधिकार कानून पर 'मिश्रित भावनाएं' व्यक्त कीं।
  • वर्तमान कानून के तहत राजकुमारी आइको सिंहासन पर नहीं बैठ सकतीं।
  • सरकार के नए संशोधनों ने लिंग समानता और शाही परिवार के भविष्य पर बहस छेड़ दी है।
  • जापान में अंतिम महिला शासक 1770 में शासन करने वाली महारानी गोसाकुरामाची थीं।

जापान के क्राउन प्रिंस अकिशिनो ने गुरुवार को सरकार द्वारा 'इंपीरियल हाउस लॉ' में किए गए संशोधनों पर अपनी अनिश्चितता व्यक्त की है। यह कानून वर्तमान में केवल पितृसत्तात्मक वंश के पुरुषों को ही सम्राट बनने की अनुमति देता है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अकिशिनो ने कहा, "मेरा मानना है कि शाही परिवार की भूमिकाओं को निभाने में पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई अंतर नहीं है।"

प्रिंस अकिशिनो के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की रूढ़िवादी सरकार ने कानून में संशोधन किया है। आलोचकों ने इस कदम को पुराना और लैंगिक भेदभावपूर्ण बताया है। इस संशोधन से यह चिंता भी बढ़ गई है कि इससे जापान का पहले से ही छोटा होता शाही परिवार और भी कमजोर हो सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल परंपरा का नहीं, बल्कि आधुनिक जापान के सामाजिक मूल्यों का भी है। राजकुमारी आइको, जो सम्राट नरुहितो की बेटी हैं, जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण वे सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं।

"समाज को प्रगति करते रहना चाहिए, और विभिन्न विचारों वाले लोगों का सर्वोत्तम के बारे में सोचते रहना महत्वपूर्ण है।" - क्राउन प्रिंस अकिशिनो

वर्तमान उत्तराधिकार क्रम में अकिशिनो के बाद राजकुमार हिसाहितो का स्थान है। नया संशोधन दूर के शाही रिश्तेदारों के अविवाहित पुरुषों को गोद लेने की अनुमति देता है ताकि वे वारिस पैदा कर सकें, लेकिन यह भी केवल पुरुष वंश तक ही सीमित है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जापान के इतिहास में आठ महिला शासक हुए हैं, जिनमें अंतिम महारानी गोसाकुरामाची थीं, जिन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया था। पितृसत्तात्मक उत्तराधिकार को पहली बार 1890 के शाही कानून में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था, जिसे 1947 के कानून में भी बरकरार रखा गया।

क्या आप जानते हैं?: जापान में अंतिम बार किसी महिला ने 1770 में सिंहासन संभाला था, जो लगभग 250 साल पहले की बात है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. राजकुमारी आइको सिंहासन पर क्यों नहीं बैठ सकतीं?
वर्तमान कानून के अनुसार, केवल पितृसत्तात्मक वंश के पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं, जो महिलाओं को उत्तराधिकार से बाहर रखता है।

2. अकिशिनो के बयान का क्या अर्थ है?
उनके बयान संकेत देते हैं कि शाही परिवार के भीतर भी लिंग समानता और आधुनिक सामाजिक जरूरतों को लेकर आंतरिक मंथन चल रहा है।