यमन में हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच ड्रोन हमलों का दौर तेज हो गया है। यह युद्ध रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहाँ अब दोनों पक्ष हवाई श्रेष्ठता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
- यमन सरकार ने हूतियों के ड्रोन हमलों का जवाब देने के लिए रिमोट-ऑपरेटेड ड्रोन्स का इस्तेमाल शुरू किया है।
- हूतियों के पास ईरानी तकनीक की मदद से अधिक उन्नत और लंबी दूरी के 'कासेफ' और 'समद' ड्रोन हैं।
- युद्ध क्षेत्र में अब FPV (फर्स्ट-पर्सन-व्यू) और फाइबर-ऑप्टिक नियंत्रित ड्रोन्स का उपयोग देखा जा रहा है।
यमन के एक दशक पुराने संघर्ष में अब एक नया और घातक मोड़ आ गया है। हाल ही में, हूती सशस्त्र समूह ने सरकारी सैन्य शिविरों और जमावड़ों पर 'वन-वे अटैक ड्रोन' से हमला किया, जिसमें दर्जनों सैनिक मारे गए। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए रिमोटली ऑपरेटेड ड्रोन्स के जरिए हूती लड़ाकों पर हमला किया है। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध के मैदान में अब ड्रोन केवल निगरानी के साधन नहीं, बल्कि प्राथमिक हथियार बन चुके हैं।
सरकारी सैन्य इकाइयों ने ऐसे वीडियो जारी किए हैं जिनमें ड्रोन लक्ष्यों को ट्रैक करते, बम गिराते और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यमनी सरकार अब एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षमता हासिल कर रही है। हालांकि ये ड्रोन हूतियों की रणनीतिक मारक क्षमता की बराबरी नहीं कर सकते, लेकिन स्थिर अग्रिम मोर्चों (front lines) पर दैनिक युद्ध के लिए ये अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यमन में ड्रोन युद्ध का यह विस्तार केवल स्थानीय संघर्ष नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। जब कम लागत वाले ड्रोन महंगे सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट कर सकते हैं, तो युद्ध का संतुलन पूरी तरह बदल जाता है। यह प्रवृत्ति दिखाती है कि कैसे गैर-राज्य अभिनेता (non-state actors) आधुनिक तकनीक का उपयोग करके पारंपरिक सेनाओं को चुनौती दे रहे हैं।
"हूतियों के पास एक दशक का परिचालन अनुभव और प्रणालियों का एक व्यापक स्पेक्ट्रम है, जो उन्हें अभी भी तकनीकी बढ़त देता है।"
हूतियों का शस्त्रागार काफी विविध है। उनके पास कासेफ (Qasef) ड्रोन हैं, जो ईरानी 'अबाबिल-टी' के समान हैं और 30 किलोग्राम विस्फोटक ले जा सकते हैं। वहीं, उनके समद-3 (Sammad-3) ड्रोन की मारक क्षमता 1,500 किलोमीटर तक है। हूतियों ने यूक्रेन युद्ध से भी प्रेरणा ली है, जहाँ अब फाइबर-ऑप्टिक नियंत्रण वाले FPV ड्रोन्स का उपयोग किया जा रहा है, जिन्हें जाम करना लगभग असंभव होता है।
दूसरी ओर, यमनी सरकार ने हाल ही में अपने रक्षा मंत्रालय के माध्यम से ड्रोन्स का प्रदर्शन किया है। हालांकि उन्होंने तकनीकी विवरण साझा नहीं किए हैं, लेकिन उनके ड्रोन मुख्य रूप से पुन: प्रयोज्य (reusable) हैं, जो लक्ष्य पर हमला कर वापस लौट सकते हैं। यह क्षमता उन्हें रसद और संसाधनों की बचत करने में मदद करती है।
| विशेषता | हूती ड्रोन क्षमता | सरकारी ड्रोन क्षमता |
|---|---|---|
| तकनीकी स्रोत | ईरानी सहायता और स्वदेशी संशोधन | व्यावसायिक अनुकूलन और आयात |
| रेंज (Range) | अत्यधिक लंबी (1,500 किमी तक) | मुख्यतः कम दूरी/सामरिक |
| प्रकार | कामिकेज़ (One-way) और निगरानी | रिमोटली ऑपरेटेड और पुन: प्रयोज्य |
Frequently Asked Questions
1. हूती ड्रोन और सरकारी ड्रोन में मुख्य अंतर क्या है?
हूतियों के पास लंबी दूरी के आत्मघाती (Kamikaze) ड्रोन हैं, जबकि सरकार वर्तमान में पुन: प्रयोज्य सामरिक ड्रोन्स पर अधिक निर्भर है।
2. ईरानी तकनीक की इसमें क्या भूमिका है?
ईरान ने हूतियों को ड्रोन डिजाइन और निर्माण में महत्वपूर्ण तकनीकी सहायता प्रदान की है, जिससे वे क्षेत्रीय शक्तियों के लिए खतरा बन गए हैं।