इजरायली सरकार ने पश्चिमी देशों में अपनी गिरती साख को बचाने के लिए कट्टरपंथी इस्लाम के डर का सहारा लेना शुरू कर दिया है। बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में यह रणनीति वैश्विक दक्षिणपंथी राजनीति को प्रभावित कर रही है।
- इजरायल पश्चिमी देशों में अपनी छवि सुधारने के लिए इस्लामफोबिया का रणनीतिक उपयोग कर रहा है।
- बेंजामिन नेतन्याहू ने यूरोपीय दक्षिणपंथी दलों के साथ मिलकर 'कट्टरपंथी इस्लाम' के खिलाफ गठबंधन बनाया है।
- इजरायल द्वारा वित्त पोषित दुष्प्रचार अभियान अब कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में सक्रिय हैं।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि इजरायल की सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाने के लिए एक खतरनाक खेल खेल रही है। गाजा में जारी संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर इजरायल की आलोचना बढ़ी है, जिसके जवाब में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब पश्चिमी देशों में 'इस्लामफोबिया' (इस्लाम के प्रति भय) को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
दक्षिणपंथी गठबंधन का उदय
जनवरी 2026 में यरूशलेम में आयोजित एक सम्मेलन ने इस रणनीति की पुष्टि की। इस कार्यक्रम में केवल यहूदी विरोधी (Anti-Semitism) मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि इसमें यूरोप के प्रमुख दक्षिणपंथी दलों जैसे पोलैंड के PiS, स्पेन के Vox और हंगरी के Fidesz के नेता भी शामिल हुए। नेतन्याहू ने इन नेताओं को 'कट्टरपंथी इस्लाम के आक्रमण' के खिलाफ एक मजबूत सहयोगी के रूप में पेश किया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है। जब इजरायल अपने सैन्य कार्यों के लिए नैतिक आधार खोने लगता है, तो वह ध्यान भटकाने के लिए 'इस्लामिक खतरे' का नैरेटिव सेट करता है। यह रणनीति पश्चिमी देशों के दक्षिणपंथी मतदाताओं को एकजुट करने के लिए डिजाइन की गई है जो पहले से ही प्रवासन और धार्मिक बदलावों को लेकर चिंतित हैं।
इजरायल अब अपनी सैन्य शक्ति के बजाय 'सांस्कृतिक रक्षा' के नैरेटिव के माध्यम से वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका में भी यह प्रभाव स्पष्ट है। 'शरिया-फ्री अमेरिका कॉकस' जैसे नए समूहों का उदय और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी इसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। इजरायल द्वारा वित्त पोषित 'क्लॉक टॉवर एक्स' जैसे अभियानों के माध्यम से जनता के बीच यह संदेश फैलाने की कोशिश की जा रही है कि अमेरिका-इजरायल संबंध वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, इजरायल ने हमेशा खुद को लोकतंत्र के अग्रदूत के रूप में पेश किया है। हालांकि, 9/11 के बाद के युग से लेकर वर्तमान तक, इजरायल की विदेश नीति में बदलाव आया है। जहाँ पहले वह केवल सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता था, वहीं अब वह सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की राजनीति को अपने अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इजरायल इस रणनीति का उपयोग क्यों कर रहा है?
उत्तर: गाजा में अपनी कार्रवाइयों के कारण वैश्विक स्तर पर अपनी साख खोने के बाद, इजरायल पश्चिमी दक्षिणपंथियों का समर्थन हासिल करने के लिए इस्लामफोबिया का उपयोग कर रहा है।
प्रश्न 2: क्या यह केवल अमेरिका तक सीमित है?
उत्तर: नहीं, यह रणनीति यूरोप और कनाडा जैसे देशों में भी सक्रिय रूप से देखी जा रही है।