अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेस्टेंट ने इरान के खिलाफ एक आर्थिक D‑Day की घोषणा की, जिसे अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला कहा गया है। इरान ने जवाब में खाड़ी से सभी तेल निर्यात बंद करने की धमकी दी।
- अमेरिका ने इरान के व्यापार भागीदारों को लक्षित करते हुए नई आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी की।
- इरान ने यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा तो खाड़ी से सभी तेल निर्यात बंद करने का वादा किया।
- डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि सैन्य टकराव नहीं हो रहा।
वाशिंगटन (द हिंदू) – अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेस्टेंट ने इरान को "आर्थिक D‑Day" की चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय आक्रमण होगा। यह बयान इरान के राष्ट्रपतियों और सुरक्षा परिषद के सदस्यों के प्रतिवाद के बीच आया, जिन्होंने खाड़ी से सभी तेल निर्यात बंद करने की घोषणा की।
बेस्टेंट ने अपनी X पोस्ट में कहा, "डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट कर दिया, अब हम आर्थिक अंतर्दृष्टि की ओर बढ़ रहे हैं। सुबह से आर्थिक D‑Day शुरू होगा – यह विरोधी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला है।" उन्होंने इरान के आर्थिक जीवनधारा को काटने का लक्ष्य बताया, जिससे ताहिरन अकेला रह जाएगा।
इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन कदमों को "बार-बार दोहराए जाने वाले परिदृश्य" कहा और कहा कि अमेरिकी नेतृत्व का सैन्य से आर्थिक परिप्रेक्ष्य में बदलाव निराशा का संकेत है। इसी बीच, इरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने कहा, "यदि आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो खाड़ी से कोई भी तेल नहीं निकलेगा।" उन्होंने इसे "अमेरिका के खिलाफ युद्ध" का हिस्सा बताया।
डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही इरान को समर्थन देने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है, विशेष रूप से चीन पर दबाव डालते हुए, जो 2025 के आंकड़ों के अनुसार इरान के 80 % तेल का खरीदार है। इस बीच, इरान ने मध्य-जून में हस्ताक्षरित समझौते को "युद्ध‑और‑शांति के बीच का समाधान" कहा, लेकिन इस पर कोई निवेश आकर्षित नहीं हो पाया।
बेस्टेंट ने सोमवार को 1 p.m. EDT (1700 GMT) पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें वह और कठोर उपायों की घोषणा करेंगे। यह कदम इरान पर 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से निरंतर लागू आर्थिक प्रतिबंधों की एक नई कड़ी जोड़ता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a coordinated economic offensive of this magnitude could reshape global oil markets, force regional allies to choose sides, and set a precedent for using financial tools as primary instruments of geopolitical coercion.
"Economic warfare, when wielded with multilateral coordination, can achieve strategic objectives faster than conventional military campaigns," says Dr. Leila Farhadi, senior fellow at the Center for International Economics.
Frequently Asked Questions
Q1: क्या नया प्रतिबंध इरान की मौजूदा आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ेगा?
ऐसा माना जा रहा है कि तेल निर्यात में कटौती इरान की राजस्व में 30 % तक की गिरावट ला सकती है, जिससे मौद्रिक अस्थिरता बढ़ेगी।
Q2: क्या अन्य देश इस आर्थिक दबाव में शामिल होंगे?
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने अभी तक आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है, लेकिन चीन और रूस पर संभावित सहयोग के संकेत मिले हैं।