सिरिया के पूर्व ग्रैंड मुफ़्ती अहमद बद्रेद्दीन हस्सौन को दमिश्क में आयोजित अदालत ने जीवन भर की सजा सुनाई। वह असद सरकार के कट्टर समर्थक थे और हिंसा को उकसाने एवं हत्या को मंजूरी देने के आरोप में दोषी पाए गए।
- अहमद बद्रेद्दीन हस्सौन को जीवन भर की सज़ा मिली
- अधिकारी को हिंसा उकसाने और हत्या को उचित ठहराने के लिए दोषी पाया गया
- निर्णय असद‑काल की धार्मिक संस्थाओं की भूमिका को उजागर करता है
डमिश्क, 24 अगस्त 2026 – सिरिया के पूर्व ग्रैंड मुफ़्ती अहमद बद्रेद्दीन हस्सौन को दमिश्क के न्यायालय ने जीवन भर की जेल की सजा सुनाई। यह फैसला चौथे आपराधिक न्यायालय के न्यायाधीश फख्रुद्दीन अल‑आर्यन ने दिया, जिन्होंने कहा कि असद शासन के तहत आध्यात्मिक नेतृत्व ने नागरिक क्षेत्रों पर बर्रे बमों के प्रयोग को उचित ठहराया था।
हस्सौन ने 2005 से 2021 तक ग्रैंड मुफ़्ती के पद पर कार्य किया, जब तक कि इस पद को राष्ट्रपति बशर असद के शासन के दौरान समाप्त नहीं किया गया। उनका सार्वजनिक समर्थन असद की नीतियों के लिए जाना जाता था, जिसमें वह अक्सर सरकार के कठोर सुरक्षा उपायों की सराहना करते थे।
सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने प्रस्तुत साक्ष्य में हस्सौन के भाषणों और बयानों को उजागर किया, जिनमें उन्होंने बार्रे बमों के उपयोग को “धार्मिक रूप से वैध” कहा था, जबकि ये बम नागरिक इलाकों को निशाना बनाते थे और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन करते थे।
यह सजा सिरिया में हाल के वर्षों में असद‑काल के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ चल रहे बड़े मुकदमों का हिस्सा है। बशर असद और उनके भाई माहेर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी को भी अलग‑अलग मामलों में मौत की सजा सुनाई गई है, अक्सर अनुपस्थित रहने के कारण।
Historical Background
2011 में शुरू हुए व्यापक विरोधों को असद सरकार ने कड़ी फांसी के साथ दबा दिया, जिससे लगभग 14‑साल का गृहयुद्ध छिड़ गया। इस संघर्ष में लगभग पाँच लाख लोग मारे गए और पूर्व-युद्धकालीन 23 मिलियन की आधी आबादी विस्थापित हो गई। अंततः दिसंबर 2024 में इस्लामी बगावतियों द्वारा तेज़ी से असद को सत्ता से हटाया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that हस्सौन की सजा न केवल व्यक्तिगत जवाबदेही को दर्शाती है, बल्कि धार्मिक संस्थानों को सार्वजनिक नीति में घुसे रहने से रोकने का एक स्पष्ट संकेत है। यह कदम नई सरकार के लिए असद‑काल की वैधता को तोड़ने और न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ करने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
"धार्मिक नेताओं को मानवाधिकार उल्लंघनों में भाग लेने से रोकना अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए आवश्यक है," मानवीय अधिकार विशेषज्ञ डॉ. लूसी मार्टिनेज ने कहा।
Frequently Asked Questions
क्या हस्सौन को सजा सुनाए जाने से अन्य धार्मिक अधिकारियों को भी मुकदमा चलाया जाएगा? अभी की जानकारी के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया जारी है और कई अन्य असद‑समर्थित धार्मिक व्यक्तियों पर जांच चल रही है।
क्या यह फैसला अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में अपील किया जा सकता है? हस्सौन के वकीलों ने बताया है कि वे स्थानीय अदालत के फैसले के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार न्यायालय में अपील करने की योजना बना रहे हैं।