राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक बाजारों में कम कीमत वाले चीनी सामानों की बाढ़ को रोकने के लिए 7.5% नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम बीजिंग के साथ व्यापार युद्ध और कूटनीतिक समझौतों के बीच एक संतुलित प्रयास माना जा रहा है।
- ट्रंप चीन के ओवरकैपेसिटी (अतिरिक्त क्षमता) से निपटने के लिए 7.5% टैरिफ पर विचार कर रहे हैं।
- यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापक टैरिफ योजना को खारिज किए जाने के बाद उठाया गया है।
- नया शुल्क मौजूदा 'जबरन श्रम' (Forced Labour) टैरिफ (10-12.5%) के ऊपर लगाया जाएगा।
- ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनी ने तनाव बढ़ा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं। यह कदम वैश्विक बाजारों में कम कीमत वाले चीनी सामानों की भारी आमद (Flooding) के जवाब में उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन 7.5% का शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह दर इतनी संतुलित है कि इससे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच मौजूदा एक साल के व्यापार समझौते या सितंबर के अंत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक को खतरा नहीं होगा।
यह कदम व्हाइट हाउस द्वारा एक कानूनी रणनीति का हिस्सा है। इस साल की शुरुआत में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की एक व्यापक और उच्च-टैरिफ योजना को खारिज कर दिया था, जो 1930 के दशक की याद दिलाती थी। उस फैसले के बाद, ट्रंप प्रशासन ने मार्च में चीन और अन्य देशों में अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन श्रम नियमों को लक्षित करते हुए औपचारिक जांच शुरू की थी। ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत यह जांच की जा रही है, जो राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ टैरिफ लगाने की अनुमति देती है जो अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि एक गहरा भू-राजनीतिक दांव है। धारा 301 का उपयोग करके, ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापार नीति को कानूनी रूप से सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि साथ ही बीजिंग पर अपनी अर्थव्यवस्था को संतुलित करने का दबाव डाल रहा है। हालांकि, इसका जोखिम यह है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और अधिक अस्थिर हो सकती है।
"7.5% का टैरिफ एक 'प्रेशर वॉल्व' रणनीति है—इसका उद्देश्य बीजिंग से रियायतें प्राप्त करना है, बिना किसी पूर्ण पैमाने के व्यापार युद्ध को शुरू किए जिससे अमेरिका में महंगाई बढ़ सके।"
चीन की ऑटो, सोलर पैनल, सीमेंट और स्टील जैसे उद्योगों में भारी क्षमता ने दुनिया भर के व्यापारिक भागीदारों का ध्यान खींचा है। चीन में घरेलू मांग कम होने के कारण, वहां की कंपनियां विदेशी बाजारों में विस्तार कर रही हैं, जिससे पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) रिकॉर्ड 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि चीन का वाणिज्य मंत्रालय इन दावों को नकारता रहा है।
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को चेतावनी दी कि उन पर नए 'सेकेंडरी प्रतिबंध' लगाए जा सकते हैं। चूंकि चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, इसलिए बीजिंग को अब व्यापार टैरिफ और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिबंधों, दोनों मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस संबंध में कड़ी चेतावनी जारी की है।
| टैरिफ का प्रकार | दर | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| प्रस्तावित चीन टैरिफ | 7.5% | अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता |
| जबरन श्रम टैरिफ | 10% - 12.5% | मानवाधिकार उल्लंघन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या यह नया टैरिफ पुराने टैरिफ की जगह लेगा?
नहीं, प्रस्तावित 7.5% टैरिफ मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाएगा, जिसमें जबरन श्रम से संबंधित टैरिफ भी शामिल हैं।
2. क्या इसका असर भारत जैसे अन्य देशों पर भी पड़ेगा?
हाँ, अमेरिका ने भारत, जापान और यूरोपीय संघ सहित कई अर्थव्यवस्थाओं में अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच शुरू की है, हालांकि उनके लिए विशिष्ट टैरिफ का निर्णय अभी बाकी है।