अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के मेल वोटिंग प्रतिबंध संबंधी आदेश को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है, जिससे आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी अधिकारियों के बीच भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के मेल वोटिंग आदेश को फिलहाल कानूनी लड़ाई के लिए रास्ता दिया है।
  • इस फैसले से चुनाव अधिकारियों और डाक सेवाओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
  • नया नियम मेल मतपत्रों के लिए विशिष्ट प्रारूप और इलेक्ट्रॉनिक सूचना प्रणाली की मांग करता है।

वाशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने देश के चुनावी परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है जो मेल वोटिंग (डाक द्वारा मतदान) को प्रतिबंधित करने की कोशिश करता है। हालांकि अदालत ने इस आदेश की वैधता पर मुहर नहीं लगाई है, लेकिन इसने कानूनी लड़ाई को फिर से शुरू कर दिया है, जिससे आगामी नवंबर के मध्यावधि चुनावों (Midterms) की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अदालत का यह फैसला मुख्य रूप से इस आधार पर आया है कि डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों द्वारा इस आदेश को चुनौती देना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। इससे पहले, बोस्टन के एक संघीय न्यायाधीश ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के इस कदम ने उस रोक को हटा दिया है। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब उत्तरी कैरोलिना में सैन्य और विदेशी मतदाताओं को सितंबर के शुरुआती सप्ताह में मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी मोड़ केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह मतदान के अधिकार और चुनावी निष्पक्षता के बीच एक गहरा संघर्ष है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो लगभग एक-तिहाई अमेरिकी मतदाताओं की मतदान पद्धति सीधे प्रभावित हो सकती है, जिससे चुनावों के परिणाम और उनकी वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।

न्यायमूर्ति केतंजी ब्राउन जैक्सन ने अपनी असहमति में कहा कि यह निर्णय आगामी मध्यावधि चुनावों में 'अनावश्यक रूप से अराजकता और अनिश्चितता' पैदा करता है।

नए नियमों के तहत, मेल मतपत्रों वाले लिफाफों के लिए एक विशिष्ट प्रारूप अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, राज्यों को एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली का उपयोग करना होगा जिससे डाक सेवा (USPS) को यह पता चल सके कि कौन सा मतदाता मेल के माध्यम से मतदान कर रहा है। यदि राज्य इस प्रणाली को अपनाने में विफल रहते हैं, तो उनके मेल मतपत्र नहीं भेजे जाएंगे। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इतने कम समय में इन तकनीकी और भौतिक बदलावों को लागू करना लगभग असंभव है।

नेवादा के राज्य सचिव सिस्को एगिलार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि महज सात दिनों के भीतर एक सटीक और विशाल डेटाबेस कैसे बनाया जा सकता है। कैलिफोर्निया के चुनाव अधिकारियों का भी कहना है कि उनके लिफाफे पहले ही छप चुके हैं और अब उनमें बदलाव करना व्यावहारिक नहीं है।

Did You Know?: 2024 के चुनावों में लगभग 29% मतदाताओं ने मेल के माध्यम से अपने मतों का प्रयोग किया था।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह आदेश तुरंत लागू हो जाएगा?
नहीं, अदालत ने केवल यह कहा है कि इसे चुनौती देने में अभी जल्दबाजी है। अंतिम कार्यान्वयन पर अभी भी कानूनी लड़ाई जारी है।

2. ट्रंप मेल वोटिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं?
ट्रंप ने बार-बार बिना प्रमाण के मेल वोटिंग पर 2020 के चुनावों में धांधली के आरोप लगाए हैं, हालांकि उन्होंने स्वयं भी कई बार मेल वोटिंग का उपयोग किया है।