ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल की त्रिशूली नदी के किनारे बसे गांवों, पुलों और बिजली केंद्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। नई सैटेलाइट तस्वीरों ने इस आपदा के भयावह पैमाने को उजागर किया है।
- ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ ने 550 से अधिक लोगों की जान ले ली है।
- सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि नेपाल-तिब्बत सीमा क्रॉसिंग और कई गांव पूरी तरह बह गए हैं।
- भूस्खलन के कारण बने एक 'बैरियर लेक' से भविष्य में और अधिक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।
हाल ही में जारी की गई नई सैटेलाइट इमेजरी ने नेपाल की त्रिशूली नदी के किनारे आई विनाशकारी बाढ़ के भयावह पैमाने को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। यह आपदा बुधवार को एक ग्लेशियर के ढहने के कारण उत्पन्न हुई अचानक आई बाढ़ (flash flood) का परिणाम थी। Vantor नामक अमेरिकी इंटेलिजेंस फर्म द्वारा जारी तस्वीरों से पता चलता है कि बाढ़ के मलबे और पानी के प्रचंड वेग ने न केवल गांवों को नष्ट कर दिया, बल्कि महत्वपूर्ण पुलों और जलविद्युत केंद्रों को भी तहस-नहस कर दिया है।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 550 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। BBC Verify द्वारा समीक्षा किए गए सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित एक प्रमुख क्रॉसिंग शामिल है, जो बाढ़ के पानी में पूरी तरह समा गई है। सीसीटीवी फुटेज में उस भयावह क्षण को कैद किया गया है जब पानी के सैलाब ने लोगों के भागने की कोशिश के बीच इमारतों को बहा दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का पिघलना और उनका अचानक ढहना अब वैश्विक जलवायु परिवर्तन का एक सीधा और घातक परिणाम है। यह आपदा केवल स्थानीय नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया के जल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए एक चेतावनी है।
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि तबाही का असर नदी के ऊपरी हिस्से में 2.5 किमी तक और पानी के स्तर से 100 मीटर ऊपर तक देखा जा सकता है। Timure जैसे गांव लगभग पूरी तरह गायब हो चुके हैं। वहीं, 10 किमी नीचे स्थित Syapru Besi गांव अब कीचड़, चट्टानों और मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है।
ग्लेशियर के ढहने से बनी नई झील (barrier lake) एक गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, यदि यह अचानक टूटती है तो दूसरी बड़ी बाढ़ आ सकती है।
Planet Labs द्वारा जारी इमेजरी आपदा के मूल स्थान यानी ढहे हुए ग्लेशियर की स्पष्ट तस्वीर दिखाती है। एक विशाल ग्लेशियर का हिस्सा अलग होने से चट्टानों और मलबे का एक गहरा रास्ता बन गया है। इसके अलावा, भूस्खलन के आधार पर एक 'बैरियर लेक' का निर्माण हुआ है। चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस झील का टूटना बचाव कार्यों में बाधा डाल सकता है और भारी तबाही ला सकता है।
भारतीय संस्थान (IISER) के ग्लैसीओलॉजिस्ट डॉ. अर्घ्य बनर्जी ने बताया कि हालांकि वर्तमान में झील का आकार स्थिर लग रहा है, लेकिन इसकी स्थिरता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। तिब्बती क्षेत्र में नुकसान का सटीक आकलन करना कठिन है क्योंकि वहां विदेशी मीडिया की पहुंच अत्यंत सीमित है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस आपदा का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: एक ग्लेशियर के अचानक ढहने के कारण त्रिशूली नदी में भीषण फ्लैश फ्लड आई, जिसने भारी तबाही मचाई।
प्रश्न 2: क्या भविष्य में और बाढ़ का खतरा है?
उत्तर: हाँ, भूस्खलन से बनी झील (barrier lake) के टूटने से दोबारा बाढ़ आने का गंभीर खतरा बना हुआ है।