नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे हिमालयी ग्लेशियरों का अचानक ढहना एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। जानिए कैसे बर्फ और चट्टानों का यह सैलाब जानलेवा आपदा में बदल जाता है।

  • ग्लेशियर का ढहना बर्फ, चट्टान और पानी के एक विशाल द्रव्यमान का अचानक अलग होना है।
  • बढ़ता तापमान और उप-ग्लेशियर (subglacial) चैनलों में पानी का जमा होना इस प्रक्रिया को तेज करता है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।
  • अस्थायी प्राकृतिक बांधों का टूटना बाढ़ की दूसरी और अधिक घातक लहर का कारण बनता है।

नेपाल और तिब्बत के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (Flash Floods) के पीछे हिमालय में हुए ग्लेशियर कोलैप्स (हिमनद का ढहना) को मुख्य कारण माना जा रहा है। BBC Verify द्वारा प्रमाणित ड्रोन वीडियो इस बात का पुख्ता सबूत देते हैं कि कैसे बर्फ और मलबे का एक विशाल ढेर लेंढे खोला और भोटे कोशी नदी प्रणाली में आ गिरा, जिससे नीचे बसी घाटियों में भारी तबाही मची।

ग्लेशियर का ढहना क्या है?

साधारण शब्दों में, ग्लेशियर कोलैप्स तब होता है जब किसी खड़ी पहाड़ी ढलान पर स्थित ग्लेशियर से बर्फ, चट्टान और पानी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अचानक अलग होकर नीचे की ओर बहने लगता है। भूगर्भीय कारक जैसे भूकंप, तापमान में अचानक बदलाव या ग्लेशियर के भीतर होने वाले भौतिक परिवर्तन इस प्रक्रिया को ट्रिगर कर सकते हैं।

यह प्रक्रिया कैसे काम करती है?

ग्लेशियर का निर्माण तब होता है जब बर्फ की परतें कई मौसमों तक जमा होती रहती हैं और दबाव के कारण ठोस बर्फ में बदल जाती हैं। ग्लैशियोलॉजिस्ट इकबाल एस. हस्नेन के अनुसार, "पहाड़ों की ढलान और बढ़ता तापमान इस प्रक्रिया के मुख्य कारक हैं।" जब तापमान बढ़ता है, तो ग्लेशियर के नीचे सूक्ष्म चैनल बन जाते हैं जिनमें पानी जमा होने लगता है। जब ग्लेशियर का निचला हिस्सा ढहता है, तो यह पानी बहुत बड़े वेग के साथ बाहर निकलता है।

बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर के नीचे पानी का जमा होना और चैनलों का बनना, बर्फ की संरचना को अंदर से कमजोर कर देता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है (Why This Matters)

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का आधार अक्सर नरम मिट्टी या मिट्टी (clay) पर टिका होता है। जब पानी इन दरारों के माध्यम से नीचे की ओर बढ़ता है, तो यह आधार को अस्थिर कर देता है। जब यह विशाल द्रव्यमान नीचे गिरता है, तो यह मिट्टी, चट्टानों और नदी के मलबे के साथ मिलकर एक घातक मिश्रण बना लेता है जो संकरी घाटियों में अत्यधिक गति से बहता है।

प्राकृतिक बांधों का खतरा

इस आपदा का एक और खतरनाक पहलू 'प्राकृतिक बांध' का निर्माण है। जब ग्लेशियर का मलबा नदी के रास्ते को रोक देता है, तो एक अस्थायी बांध बन जाता है। जब इस बांध पर पानी का दबाव असहनीय हो जाता है, तो यह अचानक टूट जाता है, जिससे बाढ़ की एक दूसरी और अधिक शक्तिशाली लहर आती है, जैसा कि हमने इस सप्ताह नेपाल में देखा।

Did You Know?: ग्लेशियर के भीतर जमा पानी के कारण बनने वाली सुरंगें (tunnels) एक गुप्त जल निकासी प्रणाली की तरह काम करती हैं जो अचानक विस्फोट का कारण बन सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

1. क्या जलवायु परिवर्तन ग्लेशियरों के ढहने का मुख्य कारण है?
हाँ, हिमालय में तेजी से बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे उनकी संरचना कमजोर हो रही है और ढहने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

2. इन आपदाओं से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
बेहतर भूकंपीय निगरानी, उच्च-ऊंचाई वाले प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और जोखिम वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (जैसे हाइड्रोपावर प्लांट) के सही ज़ोनिंग की आवश्यकता है।