नेपाल के नुवाकोट जिले में भोटेकोषी नदी में आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है, जिससे पूरा गाँव मलबे में दब गया है और कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।
- नेपाल के नुवाकोट जिले में भोटेकोषी नदी में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही।
- '1 नंबर पुल' क्षेत्र के अधिकांश घर, खेत और बागान मलबे में पूरी तरह दबे हुए।
- त्रिशुली जलविद्युत परियोजना के पास स्थित गाँव में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त।
- कई लोगों ने अपने परिजनों को खोया, जबकि कई अब भी लापता हैं।
नेपाल के नुवाकोट जिले में स्थित '1 नंबर पुल' क्षेत्र, जो कभी भोटेकोषी नदी के किनारे एक शांत और सुंदर गाँव हुआ करता था, अब केवल मलबे और कीचड़ का ढेर बनकर रह गया है। बुधवार सुबह आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (flash floods) ने इस क्षेत्र का भूगोल ही बदल दिया है। जहाँ कभी 19 घर, एक मंदिर, एक बैंक और एक किराने की दुकान हुआ करती थी, वहाँ अब केवल सन्नाटा और कीचड़ पसरा हुआ है।
बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बस्ती में अब केवल सात घर ही खड़े बचे हैं, जिनमें से तीन घर तो दूसरी मंजिल तक कीचड़ में धंस चुके हैं। किसानों की मेहनत से उपजे चावल और मक्का के खेत, साथ ही केले और सेब के बागान, सब कुछ नदी के मलबे में समा गया है।
क्यों यह आपदा इतनी भयावह है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आपदा केवल भारी बारिश का परिणाम नहीं है, बल्कि नदी के बहाव और मलबे के अचानक जमा होने से उत्पन्न हुई एक 'ब्लैक वॉटर वॉल' थी। स्थानीय निवासी द्वारका नाथ प्याकुर्याल के अनुसार, उन्होंने कभी ऐसी आपदा नहीं देखी। उन्होंने बताया कि कैसे देखते ही देखते काले पानी की एक विशाल दीवार उनके घर की ओर बढ़ी और सब कुछ तबाह कर दिया।
"हमने नदी को कई बार उफान मारते देखा है, लेकिन ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा, न ही हमारे बुजुर्गों ने कभी ऐसी तबाही के बारे में बताया।"
यह क्षेत्र त्रिशुली जलविद्युत परियोजना के करीब स्थित है, जो भारत और नेपाल की एक संयुक्त पहल थी। बाढ़ के कारण इस परियोजना के बांधों के गेट, पुल और रासुवा जिले को जोड़ने वाला तीन लेन का राजमार्ग भी मलबे के नीचे दब गया है, जिससे राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
त्रिशुली जलविद्युत परियोजना लगभग छह दशक पहले शुरू की गई थी और यह भारत-नेपाल सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रही है। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और इस परियोजना से जुड़े बुनियादी ढांचे पर टिकी थी, जो अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
Frequently Asked Questions
1. क्या बचाव कार्य जारी है?
हाँ, सेना और सुरक्षा बल राहत शिविरों के माध्यम से बचाव कार्य चला रहे हैं, लेकिन मलबे और खराब मौसम के कारण मुश्किलें आ रही हैं।
2. इस आपदा का मुख्य कारण क्या है?
भोटेकोषी नदी में अचानक पानी का स्तर बढ़ना और भारी मात्रा में मिट्टी व मलबे का नीचे आना इसका मुख्य कारण है।