प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी। यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की यह चौथी आधिकारिक यात्रा है।
- दोनों देशों ने व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया।
- भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
- स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध विकसित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच 'साझा दृष्टिकोण' (Shared Vision) को क्रियान्वित करना है, जिसमें व्यापार, पर्यटन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और रक्षा जैसे व्यापक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार शामिल है।
ताशकंद पहुँचने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने ताशकंद के 'यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक' पर पुष्पांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और वे 'विकसित भारत' और 'यांगी उज्बेकिस्तान' के साझा विजन को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मध्य एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और सुरक्षात्मक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उज्बेकिस्तान के साथ गहराते संबंध भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी के नए रास्ते खोलते हैं, जो 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक अभिन्न हिस्सा है।
उज्बेकिस्तान के साथ भारत का संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और रणनीतिक विश्वास का एक मजबूत सेतु है।
सांस्कृतिक संबंधों की बात करें तो, उज्बेकिस्तान में योग का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। भारत के सहयोग से, उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का पहला देश बना जिसने आयुष मंत्रालय के तहत योग प्रमाणन परीक्षा आयोजित की। इसके अलावा, ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में हिंदी भाषा का शिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच 'पीपल-टू-पीपल' संबंधों को मजबूती दे रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर, भारत उज्बेकिस्तान के शीर्ष 10 व्यापारिक भागीदारों में से एक है। द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। भारतीय निवेश भी नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे क्षेत्रों में 1 बिलियन डॉलर के करीब है।
| क्षेत्र | सहयोग का विवरण |
|---|---|
| व्यापारिक मूल्य | ~1 बिलियन अमेरिकी डॉलर |
| भारतीय निवेश | ~1 बिलियन अमेरिकी डॉलर |
| चिकित्सा पर्यटन | उज्बेकिस्तान भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत |
| शिक्षा | उज्बेकिस्तान में 4 भारतीय विश्वविद्यालय कार्यरत |
प्रधानमंत्री की यह यात्रा ताशकंद के बाद बिश्केक (किर्गिस्तान) के लिए होगी, जहाँ वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह शिखर सम्मेलन SCO की 25वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Frequently Asked Questions
1. पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग को गहरा करना और साझा रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
2. भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध कैसे मजबूत हुए हैं?
योग के माध्यम से, हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और चिकित्सा पर्यटन के माध्यम से दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध स्थापित हुए हैं।