भारत को अपनी मध्य एशिया रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि SCO अब केवल एक मंच नहीं, बल्कि यूरेशियाई भू-राजनीति का केंद्र बन गया है।
- SCO मध्य और दक्षिण एशिया के साथ-साथ ईरान को जोड़ने वाला एकमात्र मंच है।
- भारत को अपनी विदेश नीति में इंडो-पैसिफिक के साथ यूरेशिया पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।
- चीन के साथ हालिया सीमा समझौतों ने SCO के भीतर भारत के लिए नए अवसर खोले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताशकंद और बिश्केक की आगामी यात्राएं भारत की मध्य एशिया रणनीति और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के साथ उसके जुड़ाव को पुनर्मूल्यांकित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेंगी। पिछले तीन दशकों से, भारत ने इस विस्तारित पड़ोस के साथ अपने संबंधों को गहरा करने की कोशिश की है, लेकिन परिणाम अपेक्षाओं से काफी कम रहे हैं।
कनेक्टिविटी की कमी, पाकिस्तान के साथ कठिन संबंध और अफगानिस्तान में अस्थिरता ने भारत की वाणिज्यिक और ऊर्जा साझेदारी की महत्वाकांक्षाओं को बाधित किया है। ईरान के माध्यम से वैकल्पिक मार्गों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य में अब स्थिति बदल रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की विदेश नीति, जो हाल के वर्षों में काफी हद तक 'इंडो-पैसिफिक' नैरेटिव द्वारा संचालित रही है, उसे अब यूरेशियाई महाद्वीप की ओर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। जैसे-जैसे मध्य एशिया अधिक एकजुट हो रहा है, भारत के लिए SCO के भीतर एक अधिक सक्रिय भूमिका निभाना अनिवार्य हो जाता है।
SCO केवल एक क्षेत्रीय संगठन नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए यूरेशियाई स्थिरता और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का एक रणनीतिक द्वार है।
चीन के साथ हालिया आठ-सूत्रीय सीमा सहमति ने संबंधों में एक नई दिशा दिखाई है। पिछले वर्ष तियानजिन शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने 'SCO विकास रणनीति 2035' को अपनाया। भारत को अब केवल आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ जैसे 'तीन बुराइयों' पर चर्चा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे यूरेशिया में एक ठोस आर्थिक और सुरक्षा शक्ति के रूप में उभरना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
SCO की जड़ें 'शंघाई फाइव' में निहित हैं, जिसका उद्देश्य यूरेशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना था। 2017 में पूर्ण सदस्य बनने के बाद भी, भारत ने इस मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को लेकर अनिश्चितता दिखाई है। अब समय आ गया है कि भारत इस मंच का उपयोग अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी चुनौतियों का समाधान करने के लिए करे।
Frequently Asked Questions
1. SCO भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मध्य और दक्षिण एशिया के देशों को जोड़ने वाला एकमात्र बहुपक्षीय मंच है, जो भारत की ऊर्जा और सुरक्षा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
2. भारत के लिए मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
पाकिस्तान के साथ संबंध और अफगानिस्तान में अस्थिरता भारत की कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए सबसे बड़ी बाधाएं हैं।