मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने एक रिपोर्ट में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • HRCP ने PoK प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा घातक और अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
  • धांधली के दावों और मीडिया सेंसरशिप के कारण विधानसभा चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
  • संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने सैकड़ों मौतों का दावा किया है, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया है।
  • भारत ने PoK में हुए इन चुनावों को 'पूरी तरह से ढोंग' करार दिया है।

मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने एक विस्तृत फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की है, जिसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि राज्य ने नागरिक अशांति को दबाने के लिए "असमानुपातिक बल" का उपयोग किया है। आयोग के अनुसार, यह अशांति लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक असंतोष का परिणाम है।

विवाद का मुख्य केंद्र 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच 45 सीटों के लिए हुए चुनाव थे। प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 12 शरणार्थी सीटों के आवंटन का विरोध किया है। JAAC का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठान (Establishment) इन सीटों का उपयोग अपनी पसंद के प्रधानमंत्री को नियुक्त करने के लिए करता है ताकि PoK में उनकी कठपुतली सरकार चल सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि PoK के भीतर यह आंतरिक संघर्ष इस क्षेत्र पर पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण की कमजोरी को दर्शाता है। जब HRCP जैसा घरेलू मानवाधिकार निकाय राज्य की बर्बरता और चुनावी धोखाधड़ी की बात करता है, तो यह क्षेत्र में लोकतांत्रिक वैधता की कमी की अंतरराष्ट्रीय चिंताओं की पुष्टि करता है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चुप कराने के लिए आतंकवाद विरोधी कानूनों का उपयोग सत्तावादी शासन की ओर इशारा करता है।

संचार सेवाओं का बंद होना और घातक बल का प्रयोग यह दर्शाता है कि चुनाव के दौरान सार्वजनिक असंतोष को दुनिया की नजरों से ओझल रखने की एक सोची-समझी साजिश रची गई थी।

HRCP की रिपोर्ट में मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों पर गहरी चिंता जताई गई है। पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया, कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा और प्रभावित क्षेत्रों में उनकी पहुंच सीमित कर दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक इंटरनेट और संचार सेवाओं के बंद होने से न केवल स्वतंत्र रिपोर्टिंग बाधित हुई, बल्कि बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाएं भी ठप हो गईं। आयोग ने विशेष रूप से रवालाकोट जैसे हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक हताहतों की सटीक संख्या की पुष्टि करने में असमर्थता जताई।

चुनावी परिणामों ने भी विवाद पैदा कर दिया है। शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने 46 में से 31 सीटें जीतीं। हालांकि, बैरिस्टर इफ्तिखार गिलानी को PoK का प्रधानमंत्री चुना गया, जो सामान्य चुनाव में अपनी सीट हार गए थे लेकिन बाद में एक तकनीकी सीट के माध्यम से अंदर आए। इस फैसले की PML-N के भीतर भी कड़ी आलोचना हुई है।

भारत ने अपना रुख स्पष्ट रखा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न अंग हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधिर जायसवाल ने इन चुनावों को "पूरी तरह से ढोंग" बताया और कहा कि असली सच्चाई पाकिस्तानी बलों द्वारा की जा रही हत्याएं और जनता का विरोध है।

संस्था/पक्ष दावा/रुख वर्तमान स्थिति
JAAC जून से 400 प्रदर्शनकारियों की मौत आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित
HRCP अत्यधिक बल प्रयोग और धांधली स्वतंत्र जांच की मांग की
पाक सरकार सामूहिक मौतों के दावे को नकारा PML-N के नेतृत्व वाली सरकार बनाई
भारत (MEA) चुनाव एक 'पूर्ण ढोंग' है PoK को अपना अभिन्न अंग मानता है
क्या आप जानते हैं?: PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण 7 सीधे निर्वाचित सीटों पर मतदान स्थगित करना पड़ा था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. JAAC चुनावों का विरोध क्यों कर रहा है?
JAAC का आरोप है कि 12 शरणार्थी सीटों का उपयोग पाकिस्तानी सेना/प्रतिष्ठान द्वारा अपनी पसंद की सरकार बनाने के लिए किया जाता है।

2. मीडिया के संबंध में HRCP की मुख्य चिंता क्या थी?
HRCP ने संचार सेवाओं के बंद होने और पत्रकारों की गिरफ्तारी पर चिंता जताई, जिससे मानवाधिकार उल्लंघन की स्वतंत्र जांच असंभव हो गई।