प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के साथ रणनीतिक वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर सहमति बनी।

  • भारत और उज्बेकिस्तान ने व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
  • 'विकसित भारत' और 'यांगी उज्बेकिस्तान' के साझा विकास दृष्टिकोणों पर चर्चा हुई।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में योग सत्र में भाग लिया और भारतीय समुदाय से मुलाकात की।
  • इस यात्रा के बाद पीएम मोदी SCO शिखर सम्मेलन के लिए किर्गिस्तान रवाना होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता की। ताशकंद में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाना था। चर्चा के केंद्र में व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे रहे।

दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों के भविष्य के विजन, भारत के 'विकसित भारत' और उज्बेकिस्तान के 'यांगी उज्बेकिस्तान' (नया उज्बेकिस्तान) के बीच तालमेल बिठाने पर जोर दिया। यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक रुचि और प्रभाव को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाती है। ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि रूस और चीन के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को भी संतुलित करेगा। डिजिटल कनेक्टिविटी पर जोर देना यह संकेत देता है कि भारत अपने 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) को वैश्विक स्तर पर निर्यात करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

मध्य एशिया के साथ मजबूत संबंध भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, जो व्यापारिक मार्गों के विविधीकरण के लिए आवश्यक है।

सांस्कृतिक संबंधों पर बात करें तो, प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में योग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया। उन्होंने उल्लेख किया कि योग किस प्रकार दोनों संस्कृतियों को करीब ला रहा है। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ समय बिताया, जहाँ उन्होंने कथक और उज्बेक लोक नृत्यों का आनंद लिया, जो दोनों देशों के बीच गहरे मानवीय संबंधों को दर्शाता है।

इस यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन की तैयारी है। ताशकंद से प्रस्थान के बाद, पीएम मोदी किर्गिस्तान जाएंगे, जहाँ वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यहाँ वे 'सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर' के मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे और अन्य सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

क्या आप जानते हैं?: उज्बेकिस्तान ने अहमदाबाद में आयोजित पहले विश्व योगासन चैम्पियनशिप में गर्व के साथ भाग लिया था, जो इस देश में भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करना था।

2. SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताएं क्या होंगी?
भारत इस शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा।