प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान ताशकंद में एक विशेष योग सत्र में भाग लिया। यह यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक संबंधों और सांस्कृतिक सेतु को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन द्वारा आयोजित सत्र में भाग लिया।
- यह राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर पीएम मोदी की चौथी उज्बेकिस्तान यात्रा है।
- द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और ऊर्जा जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (30 अगस्त, 2026) को ताशकंद में उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक विशेष योग सत्र में शिरकत की। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा देना था, बल्कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करना भी था। विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि योग उज्बेकिस्तान में अत्यधिक लोकप्रिय हो रहा है और यह दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत कर रहा है।
पीएम मोदी की यह दो दिवसीय राजकीय यात्रा राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है। ताशकंद पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद उन्होंने 'यांगी उज्बेकिस्तान पार्क' का दौरा किया और स्वतंत्रता स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह यात्रा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक अभिन्न हिस्सा है, जो क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, योग का उपयोग भारत द्वारा 'सॉफ्ट पावर' डिप्लोमेसी के एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में किया जा रहा है। मध्य एशिया में भारत की उपस्थिति को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर सांस्कृतिक स्तर पर ले जाना, चीन के प्रभाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक बढ़त प्रदान करता है। यह केवल एक व्यायाम सत्र नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश है।
"योग और संस्कृति के माध्यम से मध्य एशियाई देशों के साथ जुड़ाव भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है।"
सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इस दौर में, प्रधानमंत्री ने ताशकंद में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कथक और अंदिज़न पोल्का जैसे नृत्य प्रदर्शन देखे। एक विशेष आकर्षण तब रहा जब उज्बेक बच्चों ने भारतीय गीत 'उड़े जब जब जुल्फें तेरी' पर नृत्य किया और तबले का पारंपरिक उज्बेक वाद्ययंत्रों (दोइरा और चांग) के साथ फ्यूजन प्रदर्शन किया गया।
यात्रा के अगले चरण में, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता निर्धारित है। इस बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, डिजिटल बुनियादी ढांचे और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जाएगी। यह चर्चा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखती है।
उज्बेकिस्तान के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान जाएंगे, जहां वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) चुनावों के संदर्भ में भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करना है।
प्रश्न 2: एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन का क्या महत्व है?
उत्तर: SCO शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करने का एक प्रमुख मंच है।