प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में बदल दिया है। इस यात्रा में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति और 2030 तक व्यापार बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है।

  • भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में उन्नत किया है।
  • 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक ढांचे पर चर्चा हुई।
  • प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ओलिय दराजली दोस्तलिक' से नवाजा गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ताशकंद यात्रा ने मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने राजनयिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए इसे 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' घोषित किया है। यह कदम न केवल व्यापारिक बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, जबकि 2025-26 में यह लगभग 1 बिलियन डॉलर था। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और आभूषण शामिल हैं। इसके अलावा, दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और संयुक्त सैन्य अभ्यास 'दस्तलिक' की सफलता पर संतोष व्यक्त किया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, उज्बेकिस्तान के साथ यह समझौता भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम आगे बढ़ेंगे। साथ ही, SCO और BRICS जैसे मंचों से पहले यह कूटनीतिक जीत भारत के प्रभाव को बढ़ाती है।

मध्य एशिया में भारत की पैठ केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रूस और चीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक विकल्प पेश करने की कोशिश है।

इस यात्रा के दौरान कुल 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में ICCR संस्कृत चेयर की स्थापना और हिंदी भाषा के लिए 100 लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्तियों की घोषणा की गई। साथ ही, अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 1 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की जाएगी।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी की बिश्केक यात्रा भी महत्वपूर्ण है जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें वर्षगांठ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यहाँ उनकी मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने की संभावना है, जो वैश्विक भू-राजनीति के बीच भारत के संतुलन को दर्शाता है।

क्षेत्रवर्तमान स्थिति (2025-26)लक्ष्य (2030)
द्विपक्षीय व्यापार~ $1 बिलियन$5 बिलियन
साझेदारी स्तररणनीतिक साझेदारीव्यापक रणनीतिक साझेदारी
क्या आप जानते हैं?: SCO (शंघाई सहयोग संगठन) में भारत 2017 में शामिल हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

Frequently Asked Questions

1. व्यापक रणनीतिक साझेदारी का क्या अर्थ है?
यह एक उच्च-स्तरीय राजनयिक संबंध है जिसमें रक्षा, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहन सहयोग शामिल होता है।

2. 'दस्तलिक' अभ्यास क्या है?
यह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित एक संयुक्त सैन्य अभ्यास है जो आतंकवाद विरोधी अभियानों और सैन्य समन्वय पर केंद्रित है।