नए सर्वेक्षणों से पता चला है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले भारतीय अमेरिकी मतदाता भारी संख्या में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर लौट रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के प्रति बढ़ते असंतोष ने रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

  • 66% भारतीय अमेरिकी मतदाता सीनेट और हाउस चुनावों में डेमोक्रेट्स का समर्थन कर रहे हैं।
  • 71% समुदाय डोनाल्ड ट्रम्प के समग्र प्रदर्शन से असंतुष्ट है।
  • महंगाई और जीवनयापन की लागत मतदाताओं के निर्णय का मुख्य कारण है।
  • 2026 में AAPI मतदाता मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड 90% तक पहुंचने का अनुमान है।

3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की स्थिति के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाले हैं। इस बार कांग्रेस में सत्ता का संतुलन तय करने में भारतीय अमेरिकी मतदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। हालिया आंकड़े बताते हैं कि यह समुदाय अब रिपब्लिकन पार्टी से दूरी बनाकर डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ओर झुक रहा है।

2026 एशियाई अमेरिकी मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, 66% भारतीय अमेरिकियों ने सीनेट चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही है, जबकि रिपब्लिकन को केवल 18% का समर्थन मिला। हाउस चुनावों में भी स्थिति समान है, जहां 66% मतदाता डेमोक्रेट्स के साथ हैं और केवल 22% रिपब्लिकन के पक्ष में हैं। यह रुझान पूरे एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीप समूह (AAPI) समुदाय में देखा जा रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि शासन के प्रति प्रतिक्रिया है। भारतीय अमेरिकी समुदाय अब केवल पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक नीतियों और कूटनीतिक स्थिरता के आधार पर मतदान कर रहा है। 2026 तक 16 मिलियन पात्र AAPI मतदाताओं के साथ, यह समूह कई राज्यों में जीत-हार तय करने वाला 'किंगमेकर' बन गया है।

भारतीय अमेरिकियों के बीच ट्रम्प के समर्थन में गिरावट यह दर्शाती है कि मतदाता अब लोकलुभावन भाषणों के बजाय संस्थागत स्थिरता और आर्थिक स्पष्टता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट के पीछे गहरे नीतिगत कारण हैं। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 71% भारतीय अमेरिकी ट्रम्प के प्रदर्शन से नाखुश हैं। विशेष रूप से प्रवासन (immigration), व्यापार टैरिफ और घरेलू आर्थिक नीतियों पर उनकी पकड़ को कमजोर माना गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 55% लोग भारत-अमेरिका संबंधों को संभालने के उनके तरीके से असंतुष्ट हैं।

आर्थिक चिंताएं इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण हैं। 90% AAPI मतदाताओं ने जीवनयापन की लागत और मुद्रास्फीति (महंगाई) को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया है। इस मुद्दे पर भरोसा जताने के मामले में डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी है; 44% का मानना है कि डेमोक्रेट्स महंगाई को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं, जबकि रिपब्लिकन के लिए यह आंकड़ा केवल 18% है।

मुद्दाडेमोक्रेटिक विश्वास (%)रिपब्लिकन विश्वास (%)
महंगाई/जीवनयापन लागत44%18%
स्वास्थ्य सेवाउच्चमध्यम
भारत-अमेरिका संबंधसुधार की ओरगिरावट की ओर

आर्थिक मुद्दों के अलावा, सामाजिक न्याय और नस्लवाद जैसे विषय भी चर्चा में हैं। 73% उत्तरदाताओं के लिए नस्लीय भेदभाव और नफरत के अपराध महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। साथ ही, 61% ने गर्भपात और प्रजनन अधिकारों को प्राथमिकता दी है। 90% का अनुमानित मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि इस बार मतदाता अत्यधिक जागरूक हैं।

क्या आप जानते हैं?: अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के अनुसार, 2023 तक अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगभग 52 लाख पहुंच गई है, जो इसे वहां के सबसे तेजी से बढ़ते और शिक्षित समुदायों में से एक बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय अमेरिकी डोनाल्ड ट्रम्प से दूर क्यों हो रहे हैं?
मुख्य कारणों में अर्थव्यवस्था, प्रवासन नीतियों और विशेष रूप से भारत-अमेरिका राजनयिक संबंधों के प्रति असंतोष शामिल है।

2026 के चुनावों में AAPI वोट का क्या महत्व है?
16 मिलियन पात्र मतदाताओं के साथ, AAPI समूह एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है, जो हाउस और सीनेट दोनों में सत्ता संतुलन को बदल सकता है।