नेपाल के रसुआ और नुवाकोट जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 11 जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में करीब 933 कर्मचारी फंसे हुए हैं। भारत और चीन के विशेषज्ञों की मदद से बचाव अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा है।

  • नेपाल की 11 जलविद्युत परियोजनाओं में लगभग 933 कर्मचारी लापता या फंसे हुए हैं।
  • सबसे अधिक प्रभावित 'अपर त्रिशुली-1' परियोजना है, जहाँ 576 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
  • भारत और चीन के विशेषज्ञ बचाव कार्यों में नेपाल सेना की मदद कर रहे हैं।
  • बाढ़ का मुख्य कारण उत्तरी पहाड़ी जिले में बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन (Ice-rock avalanche) माना जा रहा है।

नेपाल के भोटेकोशी-त्रिशुली नदी गलियारे में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अब एक बड़ी मानवीय त्रासदी सामने आई है, जहाँ अनुमान है कि 11 अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के भीतर 933 लोग फंसे हुए हैं। इनमें से अधिकांश परियोजनाएं रसुआ और नुवाकोट जिलों में स्थित हैं, जो तिब्बत सीमा के करीब हैं। अधिकारियों का मानना है कि लापता लोग या तो गाद से भरी सुरंगों में फंसे हैं या बाढ़ के पानी में बह गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, सबसे गंभीर स्थिति अपर त्रिशुली-1 परियोजना की है, जो दक्षिण कोरियाई कंपनियों (Doosan/KOEN) द्वारा संचालित है। यहाँ अकेले 576 कर्मचारियों के लापता होने की खबर है। इसके अलावा, अपर त्रिशुली-3B में 122 और रसुआगढ़ी परियोजना में 93 लोग लापता हैं। बचाव दल इस समय मलबे के विशाल पहाड़ों और चट्टानों के बीच रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकास और पर्यावरणीय जोखिमों के बीच के संघर्ष को उजागर करती है। जलविद्युत परियोजनाओं के लिए बनाई गई गहरी सुरंगें, जो सामान्य परिस्थितियों में इंजीनियरिंग का चमत्कार लगती हैं, आपदा के समय 'डेथ ट्रैप' (मौत के जाल) में बदल जाती हैं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठाता है कि क्या इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान पर्याप्त आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल अपनाए गए थे।

परियोजना का नाम लापता लोग (अनुमानित) स्थिति/नोट्स
अपर त्रिशुली-1 576 सबसे बड़ा समूह; कोरियाई प्रोजेक्ट
अपर त्रिशुली-3B 122 भोटेकोशी-त्रिशुली कॉरिडोर
रसुआगढ़ी 93 साइट पर भारी नुकसान
अपर त्रिशुली-3A 42 रसुआ/नुवाकोट क्षेत्र

बचाव कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी और पत्थरों के भारी जमाव के कारण पूरी तरह बंद हो चुके हैं। नेपाल सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने बताया कि मुख्य ध्यान सुरंगों को फिर से खोलने पर है। चीन ने अपनी वायु सेना के Y-20 परिवहन विमानों के जरिए चार विशेषज्ञ बचाव कर्मियों को सीधे आपदा क्षेत्र में भेजा है, जबकि भारत भी अपनी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।

"समय इस समय सबसे बड़ा दुश्मन है; सुरंगों के भीतर ऑक्सीजन की कमी और मलबे का दबाव जीवित बचे लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।"

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस घटना को 'अभूतपूर्व और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा' करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की अपील की है। यह आपदा एक ऐसे समय में आई है जब नेपाल राजनीतिक अस्थिरता से उबरने की कोशिश कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: नेपाल दुनिया के सबसे जोखिम भरे क्षेत्रों में से एक है जहाँ 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स' (GLOF) का खतरा हमेशा बना रहता है, जो अचानक विनाशकारी बाढ़ का कारण बनते हैं।

1. नेपाल में बाढ़ आने का मुख्य कारण क्या था?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, उत्तरी पहाड़ी जिले में एक बड़े बर्फ-चट्टान हिमस्खलन (Ice-rock avalanche) के कारण भोटेकोशी-त्रिशुली नदी गलियारे में अचानक बाढ़ आई।

2. सबसे अधिक लोग किस प्रोजेक्ट में फंसे हैं?
सबसे अधिक लापता लोग 'अपर त्रिशुली-1' परियोजना से हैं, जिनकी संख्या लगभग 576 बताई जा रही है।