नेपाल में विनाशकारी बाढ़ ने देश की 10% बिजली क्षमता को ठप कर दिया है और सैकड़ों कर्मचारी लापता हैं। विशेषज्ञ अब हिमालय में जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे की मांग कर रहे हैं।
- लगभग 700 मेगावाट जलविद्युत क्षमता (राष्ट्रीय कुल का 10%) ठप।
- एक दर्जन परियोजनाओं से लगभग 900 कर्मचारी लापता; सैकड़ों सुरंगों में फंसे।
- नेपाल का अनुमानित 124 बिलियन डॉलर का बुनियादी ढांचा जलवायु आपदाओं के जोखिम में।
- विशेषज्ञों ने 'अविनाशी' संरचनाओं के बजाय 'सिस्टम रिडंडेंसी' और सुरक्षित स्थानों पर जोर दिया।
मध्य नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, धाडिंग, रसुवा और नुवाकोट जैसे जिलों में कर्मचारी हजारों निवासियों के लिए बिजली बहाल करने के लिए गाद और मलबे को हटाने में जुटे हैं। हालांकि, सफाई अभियान के बीच एक गंभीर वास्तविकता सामने आई है: विनाश के इस पैमाने ने नेपाल की ऊर्जा रणनीति और बुनियादी ढांचा नियोजन की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
इस आपदा ने देश के जलविद्युत नेटवर्क को गहरा झटका दिया है, जिससे अनुमानित 700 मेगावाट क्षमता ठप हो गई है। मानवीय क्षति भी उतनी ही भयावह है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, विभिन्न परियोजनाओं के लगभग 900 कर्मचारी लापता हैं, जिनमें से कई के पानी के मोड़ और रखरखाव के लिए बनाई गई गहरी सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'रन-ऑफ-रिवर' जलविद्युत परियोजनाओं पर नेपाल की अत्यधिक निर्भरता एक खतरनाक विरोधाभास पैदा करती है। हालांकि ये परियोजनाएं आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन खड़ी और अस्थिर नदी घाटियों में उनकी स्थिति उन्हें आपदाओं के लिए 'फोर्स मल्टीप्लायर' बनाती है। जब ये संरचनाएं विफल होती हैं, तो वे केवल बिजली ही नहीं खोतीं, बल्कि मलबे की भारी मात्रा छोड़ कर निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे को और बढ़ा देती हैं।
"अधिकारियों को अब आईने में देखना होगा और यह पूछना होगा कि वे इन जगहों पर पुनर्निर्माण कैसे करेंगे... भौतिक बचाव विफल हो सकते हैं, जिससे लोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा बन जाती है।" - जैकब स्टीनर, भू-वैज्ञानिक।
जलविद्युत क्षेत्र के अलावा, दर्जनों किलोमीटर सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र नष्ट हो गए हैं। डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन के रामराज नरसिम्हन ने इंजीनियरिंग में एक बुनियादी बदलाव का सुझाव दिया है। संरचनाओं को पूरी तरह 'अविनाशी' बनाने के बजाय, ध्यान रिडंडेंसी (redundancy) पर होना चाहिए—यानी वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, बैकअप पावर सिस्टम और रिकवरी को तेज करने के लिए बीमा जैसे वित्तीय साधनों का उपयोग।
क्षेत्र की संवेदनशीलता इस तथ्य से और बढ़ जाती है कि हिमालयी क्षेत्र दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की रिपोर्ट बताती है कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, अस्थिर ढलान और अनियमित वर्षा पैटर्न बाढ़ और भूस्खलन के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
| पहलू | पारंपरिक दृष्टिकोण | प्रस्तावित लचीला दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| डिजाइन लक्ष्य | संरचनात्मक मजबूती | सिस्टम रिडंडेंसी और रिकवरी |
| स्थान चयन | केवल बिजली उत्पादन के आधार पर | जोखिम-आकलन आधारित सुरक्षित क्षेत्र |
| ऊर्जा मिश्रण | जलविद्युत का प्रभुत्व | विविध (सौर + जलविद्युत) |
| चेतावनी प्रणाली | प्रतिक्रियाशील/स्थानीय | सक्रिय/क्षेत्रीय एकीकरण |
पर्यावरण समर्थकों, जिनमें हिमांशु ठक्कर शामिल हैं, का तर्क है कि भविष्य की परियोजनाओं का कठोर सामाजिक और आपदा-जोखिम मूल्यांकन होना चाहिए। नेपाल में सौर ऊर्जा को एकीकृत कर ऊर्जा ग्रिड का विकेंद्रीकरण करने की मांग बढ़ रही है, ताकि केंद्रीकृत जलविद्युत केंद्रों से जुड़े विनाशकारी जोखिमों को कम किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी सुरंगों में क्यों फंसे हैं?
उत्तर: कर्मचारी अक्सर अचानक आई बाढ़ के दौरान एक्सेस और डायवर्जन सुरंगों को तत्काल आश्रय के रूप में उपयोग करते हैं, लेकिन जब ये सुरंगें मलबे से भर जाती हैं या भूस्खलन से बंद हो जाती हैं, तो वे जाल बन जाती हैं।
प्रश्न: जलवायु परिवर्तन विशेष रूप से नेपाल की जलविद्युत को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं और ढलान अस्थिर हो जाते हैं, जिससे अप्रत्याशित बाढ़ आती है जो नदी-आधारित बिजली संयंत्रों को नष्ट कर देती है।