नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन एक बार फिर कोरोना काल जैसी सेंसरशिप अपना रहा है। हताहतों की वास्तविक संख्या छिपाने के लिए चीन सरकार सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और नागरिकों को जेल भेजने का सहारा ले रही है।

वीडियो लोड हो रहा है...
  • चीन ने नेपाल-तिब्बत सीमा आपदा के बाद सूचनाओं पर पूर्ण 'ब्लैकआउट' लागू किया है।
  • सरकारी आंकड़ों के विपरीत जानकारी साझा करने वालों को 3-7 साल की जेल और जुर्माने की धमकी।
  • तिब्बत के गिरोंग पोर्ट पर वास्तविक हताहतों की संख्या को दबाने के लिए साइबर सुरक्षा पुलिस सक्रिय।
  • चीन का उद्देश्य अपनी छवि बचाना और तिब्बत में अपनी नीतियों पर उठने वाले सवालों को रोकना है।

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आए विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, लेकिन इस मानवीय त्रासदी से ज्यादा चर्चा चीन के उस रवैये की हो रही है जो उसने 2020 के कोरोना काल में अपनाया था। चीन की सरकार एक बार फिर सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए 'ब्लैकआउट' तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, ताकि दुनिया को आपदा की भयावहता का पता न चले।

तिब्बत के गिरोंग पोर्ट से सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरें तेजी से गायब किए जा रहे हैं। चीनी साइबर सुरक्षा पुलिस ने अब तक 10 ऐसे मामलों का खुलासा किया है जिनमें लोगों ने आधिकारिक आंकड़ों से अधिक मौतों का दावा किया था। जहाँ चीनी मीडिया केवल 16 मौतों की बात कर रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर दावे किए जा रहे हैं कि सैकड़ों लोग लापता हैं और हजारों प्रभावित हुए हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चीन के लिए यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा है। तिब्बत एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ चीन का नियंत्रण 1950 के दशक से है। किसी भी बड़ी आपदा से चीन के बुनियादी ढांचे, बांध निर्माण नीतियों और पर्यावरणीय प्रबंधन पर सवाल उठते हैं, जिसे बीजिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करना चाहता।

चीन की सूचना नियंत्रण नीति मानवीय संवेदनाओं से ऊपर अपनी राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक छवि को रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।

चीनी कानून के तहत, 'अफवाह' फैलाने के आरोप में नागरिकों को 10 दिन की हिरासत और 1000 युआन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में, जैसे कि इंटरनेट यूजर 'क्यू' और 'लिऊ' के मामले में हुआ, जहाँ उन्होंने 1,400 से 3,000 मौतों का दावा किया था, वहां 3 से 7 साल की जेल तक का प्रावधान है। यह डर का माहौल परिवारों को अपने प्रियजनों की खबर पाने से भी रोक रहा है।

चीन यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा है कि आपदा नेपाल की तरफ से शुरू हुई। वह तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में बन रहे अपने बांधों के सुरक्षा ऑडिट से बचना चाहता है। यदि वास्तविक नुकसान का पैमाना बाहर आता है, तो यह सीधे तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यक्षमता पर प्रहार होगा।

क्या आप जानते हैं?: चीन में 'ग्रेट फायरवॉल' के जरिए इंटरनेट सेंसरशिप इतनी सख्त है कि आपदा के समय भी केवल सरकारी स्वीकृत तस्वीरें ही बाहर आ पाती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चीन आपदा की खबरों को क्यों दबा रहा है?
उत्तर: चीन अपनी वैश्विक छवि को बचाने और तिब्बत में अपनी विकास नीतियों व बांध निर्माणों पर उठने वाले सवालों को दबाने के लिए ऐसा कर रहा है।

प्रश्न 2: गलत जानकारी साझा करने पर चीन में क्या सजा है?
उत्तर: मामूली मामलों में जुर्माना और हिरासत, जबकि गंभीर मामलों में 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।