प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से मुलाकात की और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं समुद्री स्थिरता पर चर्चा की।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन की बिश्केक, किर्गिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई।
- चर्चा का मुख्य केंद्र हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता रही।
- यह बैठक पीएम मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली शाम की मुलाकात से पहले हुई।
किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर एक महत्वपूर्ण राजनयिक कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। यह मुलाकात मध्य पूर्व के अस्थिर भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच तेहरान के साथ संतुलित रणनीतिक संबंध बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
इस चर्चा का प्राथमिक एजेंडा हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा था, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक जीवन रेखा है। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा प्रवाह में व्यवधानों को रोकने के लिए समुद्री स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि मध्य एशिया और फारस की खाड़ी में भारत के प्रभाव को सुरक्षित करने का एक सोचा-समझा कदम है। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के साथ जुड़कर, भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना को सक्रिय रखने के अपने इरादे का संकेत देता है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार सुनिश्चित करता है।
"भारतीय ऊर्जा आवश्यकताओं और ईरानी रणनीतिक स्थिति का संगम मोदी-पेज़ेश्कियन संवाद को यूरेशियाई स्थिरता के लिए आवश्यक बनाता है।"
यह बैठक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पीएम मोदी की शाम की बहुप्रतीक्षित चर्चा की भूमिका भी तैयार करती है। इन बैठकों का समन्वय रूस, ईरान और पश्चिम के बीच जटिल 'त्रिकोणीय' कूटनीति को चलाने की एक व्यापक भारतीय रणनीति का सुझाव देता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत उभरते बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहे।
ऐतिहासिक रूप से, भारत-ईरान संबंध क्षेत्रीय शांति और आतंकवाद विरोधी साझा हितों द्वारा gekennzeichnet रहे हैं। हालांकि, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस रिश्ते को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। वर्तमान संवाद आर्थिक सहयोग और सुरक्षा ढांचे में समान आधार खोजने के एक नए प्रयास का संकेत देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोदी-पेज़ेश्कियन बैठक का मुख्य केंद्र क्या था?
मुख्य ध्यान क्षेत्रीय सुरक्षा, विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर था।
यह बैठक कहाँ आयोजित की गई थी?
यह बैठक एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर बिश्केक, किर्गिस्तान में आयोजित की गई थी।