किर्गिस्तान में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की। इस बैठक में पश्चिम एशिया की अस्थिरता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट पर चर्चा की।
- भारत ने क्षेत्रीय शांति के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे हालिया घटनाक्रमों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के निरंतर रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र के सभी विवादों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फरवरी 2026 में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खमेनी की हत्या के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात है। भारत के लिए ईरान न केवल एक ऊर्जा भागीदार है, बल्कि मध्य एशिया तक पहुँचने का एक प्रमुख द्वार भी है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया युद्ध की कगार पर है, भारत का संतुलित दृष्टिकोण उसे एक वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करता है।
"पश्चिम एशिया में अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों को प्रभावित करती है, इसलिए भारत का कूटनीतिक हस्तक्षेप अनिवार्य है।"
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नेविगेशन और वाणिज्य की स्वतंत्रता की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2026 में भी पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन से इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की थी, क्योंकि इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकता है।
यह शिखर सम्मेलन एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा स्थापित इस संगठन में भारत और पाकिस्तान 2017 में शामिल हुए थे, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बने।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल ईरान तक सीमित नहीं है; वे राष्ट्रपति सादिर जापारोव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं, जिससे यूरेशियाई राजनीति में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: बैठक का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करना और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता तथा समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
उत्तर: भारत और ईरान दोनों इस संगठन के पूर्ण सदस्य हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आर्थिक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।