प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान किर्गिस्तान और ईरान के राष्ट्रपतियों के साथ गहन चर्चा की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर जोर दिया गया।
- पीएम मोदी ने किर्गिस्तान के साथ डिजिटल बुनियादी ढांचे और व्यापार विस्तार पर चर्चा की।
- ईरानी राष्ट्रपति के साथ पश्चिम एशिया संकट और समुद्री सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।
- किर्गिस्तान में अध्ययनरत 16,000 भारतीय छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के हाशिए पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में रणनीतिक कूटनीति का प्रदर्शन करते हुए किर्गिस्तान और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था, बल्कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच स्थिरता सुनिश्चित करना भी था।
मेजबान देश, किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने पर चर्चा की। इसमें विशेष रूप से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), औद्योगिक सहयोग और तकनीकी इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना पर जोर दिया गया। पीएम मोदी ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि किर्गिस्तान में वर्तमान में 16,000 से अधिक भारतीय छात्र चिकित्सा की शिक्षा ले रहे हैं, और उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत का मध्य एशिया की ओर झुकाव न केवल आर्थिक है, बल्कि रणनीतिक भी है। किर्गिस्तान जैसे देशों के साथ डिजिटल और शैक्षिक सहयोग भारत की 'सॉफ्ट पावर' को बढ़ाता है, जबकि ईरान के साथ संबंध पश्चिम एशिया में भारत की स्थिति को संतुलित करते हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। यह बैठक पश्चिम एशिया में जारी गंभीर संकट के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण थी। चर्चा का मुख्य केंद्र ऊर्जा संबंध, व्यापारिक मार्ग और विशेष रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय नाविकों की सुरक्षा रहा।
"क्षेत्रीय स्थिरता के बिना वैश्विक व्यापार सुरक्षित नहीं रह सकता; संवाद ही एकमात्र रास्ता है।"
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बात को दोहराया कि सभी क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए ईरान का आभार व्यक्त किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने हैं, जिसमें चाबहार बंदरगाह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। वहीं, किर्गिस्तान के साथ भारत के संबंध हाल के वर्षों में शैक्षिक आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग के माध्यम से तेजी से विकसित हुए हैं। एससीओ मंच इन संबंधों को एक बहुपक्षीय ढांचा प्रदान करता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पीएम मोदी ने किर्गिस्तान के साथ किन मुख्य क्षेत्रों पर चर्चा की?
उत्तर: उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, औद्योगिक सहयोग और भारतीय छात्रों के कल्याण पर चर्चा की।
प्रश्न 2: ईरान के साथ बैठक का मुख्य मुद्दा क्या था?
उत्तर: मुख्य मुद्दा पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा संबंध और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा था।