एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया गया।
- प्रधानमंत्री मोदी ने रूस और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
- एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई।
- भारत-रूस-ईरान त्रिपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।
नई दिल्ली/अस्ताना: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के हाशिये पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक राजनीति के महत्वपूर्ण मोर्चों पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ गहन चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और मध्य एशिया में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
रूस के साथ बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों पर विस्तार से बात की। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और रूस के संबंध 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर हैं, जो किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रूस और ईरान के साथ एक साथ जुड़ाव यह दर्शाता है कि भारत एक संतुलित विदेश नीति अपना रहा है। जहाँ एक ओर भारत पश्चिम के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह यूरेशियाई क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यह रणनीति भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) के एक स्वाभाविक नेता के रूप में स्थापित करती है।
"भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता यह स्पष्ट करती है कि वह बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।"
ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के साथ बातचीत में मुख्य केंद्र बिंदु चाबहार बंदर का विकास और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) रहा। भारत के लिए ईरान एक प्रवेश द्वार की तरह है, जिसके माध्यम से वह मध्य एशिया और रूस तक अपनी पहुंच बना सकता है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत का रूस के साथ संबंध शीत युद्ध के दौर से रहा है, जबकि ईरान के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। वर्तमान समय में, इन संबंधों का पुनरुद्धार न केवल आर्थिक लाभ के लिए है, बल्कि आतंकवाद विरोधी प्रयासों और क्षेत्रीय शांति के लिए भी अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions
1. एससीओ शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
2. चाबहार बंदर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है।