बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की और पश्चिम एशिया संघर्ष को बातचीत के जरिए सुलझाने का आग्रह किया।

  • भारत ईरान के साथ अपने व्यापारिक दायरे को बढ़ाने और विविधता लाने का इच्छुक है।
  • पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के तनाव को संवाद और कूटनीति के माध्यम से हल करने का आह्वान किया।
  • नेविगेशन की स्वतंत्रता और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
  • आर्मेनिया के साथ रक्षा, आईटी और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बैठक में भारत ने ईरान के साथ अपनी क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत करने और शांति के लिए राजनयिक मार्ग अपनाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन को बताया कि भारत आने वाले वर्षों में ईरान के साथ अपने "व्यापारिक बास्केट का विस्तार और विविधीकरण" करना चाहता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने और गहरे सांस्कृतिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग को नए आयाम देने की आवश्यकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि ईरान के साथ भारत का यह दृष्टिकोण एक संतुलित कूटनीति का हिस्सा है। व्यापार विविधीकरण के माध्यम से, भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, बल्कि मध्य एशिया तक अपनी पहुंच को भी मजबूत करना चाहता है। यह रणनीति भारत को पश्चिम एशिया के अस्थिर माहौल में एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित करती है।

पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष पर चर्चा करते हुए, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि पीएम मोदी ने तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वाणिज्यिक शिपिंग और नाविकों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को किसी भी परिस्थिति में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

"पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष के बजाय कूटनीति पर भारत का जोर यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अब वैश्विक स्तर पर एक 'शांतिदूत' की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।"

ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने हालिया युद्ध के दौरान भारत के सहयोग की सराहना की। उन्होंने मोदी से आग्रह किया कि भारत अपने वैश्विक संपर्कों का उपयोग करके क्षेत्रीय देशों को "युद्ध और रक्तपात के रास्ते" से हटाकर बातचीत की मेज पर लाए। उन्होंने अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका ने कूटनीति के बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुना है।

इसी शिखर सम्मेलन के दौरान, पीएम मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोला पाशिन्यान से भी मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा, आईटी, अंतरिक्ष, शिक्षा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह कदम काकेशस क्षेत्र में भारत के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं?: एससीओ (SCO) दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संगठनों में से एक है, जिसमें दुनिया की लगभग 40% आबादी शामिल है।
फोकस क्षेत्र भारत-ईरान संवाद भारत-आर्मेनिया संवाद
मुख्य लक्ष्य व्यापार विस्तार और क्षेत्रीय शांति रणनीतिक और तकनीकी सहयोग
प्रमुख क्षेत्र ऊर्जा, शिपिंग, कूटनीति रक्षा, आईटी, फार्मा, अंतरिक्ष
क्षेत्रीय संदर्भ पश्चिम एशिया स्थिरता काकेशस एकीकरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ईरान के साथ व्यापार के संबंध में भारत का मुख्य लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य अपने व्यापारिक दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना है ताकि आर्थिक संबंध मजबूत हों।

प्रश्न 2: पश्चिम एशिया संघर्ष पर पीएम मोदी का क्या रुख था?
उन्होंने संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।