प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में पुतिन और पेज़ेशकियन से मुलाकात कर संवाद के जरिए युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया, जबकि नेपाल में विनाशकारी बाढ़ ने अब तक 903 लोगों की जान ले ली है।
- पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से 'अंतहीन युद्ध' को समाप्त करने का आग्रह किया।
- ईरान के राष्ट्रपति के साथ पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने के लिए कूटनीति पर चर्चा।
- नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 903 मौतें और 4,247 लोग अभी भी लापता।
- सद्गुरु ने हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए पांच देशों के बोर्ड का प्रस्ताव दिया।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी मुलाकात में स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को अब 'अंतहीन युद्ध' से निकलकर 'युद्ध के अंत' की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान पूरी मानवता की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसी कूटनीतिक दौरे के दौरान, पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन से भी मुलाकात की। उन्होंने पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस संकट का एकमात्र समाधान संवाद और कूटनीति है। इसके साथ ही, भारत ने ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को और अधिक विविधतापूर्ण बनाने और विस्तारित करने की इच्छा जताई।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह दोहरा दृष्टिकोण भारत को एक 'ग्लोबल पीसमेकर' के रूप में स्थापित करता है। एक तरफ रूस-यूक्रेन और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के संकटों में मध्यस्थता की कोशिशें यह दर्शाती हैं कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को दिशा देने वाला एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है।
"शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि संवाद की उपस्थिति है, जिसे पीएम मोदी ने बिश्केक में प्राथमिकता दी।"
दूसरी ओर, दक्षिण एशिया में नेपाल एक भीषण मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। हालिया फ्लैश फ्लड्स (अचानक आई बाढ़) ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपदा भूकंप या ग्लेशियर फटने के कारण नहीं, बल्कि उच्च हिमालय में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर गिरने से हुई है। चीन ने अपने जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को इस आपदा से जोड़ने वाले दावों को 'दुर्भावनापूर्ण अटकलें' बताकर खारिज कर दिया है।
नेपाल में बचाव कार्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों की तलाश जारी है। बचाव दलों के पास बॉडी बैग्स, रस्सियों और हेलीकॉप्टरों जैसी बुनियादी उपकरणों की भारी कमी है। चीन ने सहायता के रूप में 2.2 मिलियन डॉलर की घोषणा की है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
इस बीच, आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर एक 'पांच-राष्ट्र हिमालयी बोर्ड' बनाने का आह्वान किया है, ताकि इस नाजुक पर्वतीय क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के लिए बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
Frequently Asked Questions
1. नेपाल में बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपदा उच्च हिमालय में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर गिरने (ice and rock fall) के कारण आई फ्लैश फ्लड से हुई थी।
2. पीएम मोदी ने पुतिन से क्या अपील की?
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन के साथ युद्ध को समाप्त करने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आग्रह किया।