नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से सैकड़ों मौतों के बाद, चीन ने तिब्बत में अपने जलविद्युत परियोजनाओं के जिम्मेदार होने के दावों को 'दुर्भावनापूर्ण अटकलें' बताकर खारिज कर दिया है।
- चीन ने नेपाल की बाढ़ के लिए अपने तिब्बत बांधों के जिम्मेदार होने के दावों को खारिज किया।
- नेपाल में मरने वालों की संख्या 903 तक पहुंच गई है, जबकि 4,247 लोग अभी भी लापता हैं।
- बीजिंग का दावा है कि आपदा का कारण नेपाल में एक उच्च-ऊंचाई वाले ग्लेशियर का ढहना था।
- ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का विशाल बांध परियोजना भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है।
बीजिंग में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि तिब्बत में चीन की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का नेपाल की हालिया विनाशकारी बाढ़ से संबंध है। चीन ने इन दावों को "दुर्भावनापूर्ण अटकलें" करार दिया है। पिछले सप्ताह आई इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लापता हो गए।
चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक बर्फ-चट्टान हिमस्खलन (ice-rock avalanche) के कारण शुरू हुई थी। प्रवक्ता गुओ ने स्पष्ट किया कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चलता है कि कीचड़ का धंसना नेपाल में एक उच्च-ऊंचाई वाले ग्लेशियर के ढहने के कारण हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि चीन हताहतों की संख्या को कम करके नहीं बता रहा है और राहत कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ जारी हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल एक प्राकृतिक आपदा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र में जल-भू-राजनीति (Hydro-politics) के गहरे तनाव को दर्शाता है। चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे 167.8 बिलियन डॉलर के विशाल बांध ने पहले ही भारत और बांग्लादेश जैसे निचले देशों में चिंताएं पैदा कर दी हैं। जब भी इस क्षेत्र में कोई आपदा आती है, तो बांधों की सुरक्षा और पानी के अचानक छोड़े जाने की संभावनाओं पर सवाल उठते हैं।
हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी और सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर इतने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण भविष्य में और भी गंभीर आपदाओं को निमंत्रण दे सकता है।
तिब्बत के अधिकारियों ने बताया कि ग्यिरोंग पोर्ट पर आई बाढ़ में 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 49 भारतीयों सहित 546 लोग लापता हैं। वहीं, नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल में मरने वालों की संख्या 903 तक पहुंच गई है।
ऐतिहासिक रूप से, तिब्बती पठार, जिसे "दुनिया की छत" कहा जाता है, भूकंपीय रूप से अत्यंत सक्रिय रहा है। चीनी भूवैज्ञानिकों ने स्वयं चेतावनी दी है कि ब्रह्मपुत्र परियोजना एक सक्रिय फॉल्ट लाइन पर बनाई जा रही है, जिससे जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, चीन का दावा है कि वह निर्माण में उच्चतम औद्योगिक मानकों का पालन कर रहा है।
| क्षेत्र | मृतकों की संख्या | लापता लोग |
|---|---|---|
| नेपाल | 903 | 4,247 |
| तिब्बत (ग्यिरोंग पोर्ट) | 16 | 546 (49 भारतीय सहित) |
Frequently Asked Questions
1. चीन ने बाढ़ के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया है?
चीन ने कहा है कि यह आपदा नेपाल में एक उच्च-ऊंचाई वाले ग्लेशियर के ढहने के कारण हुई, न कि किसी बांध की विफलता से।
2. ब्रह्मपुत्र बांध परियोजना को लेकर मुख्य चिंता क्या है?
मुख्य चिंता यह है कि यह बांध एक सक्रिय भूकंपीय फॉल्ट लाइन पर बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में बांध टूटने या बाढ़ आने का खतरा है।