प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने और 2026-2027 के लिए एससीओ काउंसिल की अध्यक्षता संभालने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं।

  • पीएम शहबाज शरीफ एससीओ राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के लिए बिश्केक पहुंचे।
  • पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर 2026-2027 के लिए एससीओ काउंसिल की अध्यक्षता संभालेगा।
  • किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर नूर्गोज़ोविच जापारोव के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता।
  • व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर विशेष जोर।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सोमवार को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर किर्गिस्तान पहुंचे। यह यात्रा किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर नूर्गोज़ोविच जापारोव के निमंत्रण पर आयोजित की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की बैठक है। प्रधानमंत्री शरीफ 2026-2027 के लिए एससीओ काउंसिल की अध्यक्षता संभालेंगे। यह भूमिका पाकिस्तान को मध्य और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तान का एससीओ की अध्यक्षता संभालना एक ऐसे समय में आया है जब देश अपनी आर्थिक साझेदारी में विविधता लाने और क्षेत्रीय स्थिरता खोजने की कोशिश कर रहा है। एससीओ का नेतृत्व करके, इस्लामाबाद का लक्ष्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।

एससीओ की अध्यक्षता पाकिस्तान को रूस और चीन जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ एक बहुपक्षीय गुट का नेतृत्व करने का दुर्लभ अवसर देती है, जो एशिया में उसके राजनयिक प्रभाव को बदल सकता है।

शिखर सम्मेलन के अलावा, शरीफ 'एससीओ प्लस समिट' में भाग लेंगे और वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। बुधवार को राष्ट्रपति जापारोव के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा और पर्यटन जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी गया है, जिसमें उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, वाणिज्य मंत्री जाम कमाल खान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान इस दौरे के माध्यम से राजनीतिक सद्भावना को व्यावहारिक आर्थिक सहयोग में बदलना चाहता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

एससीओ की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, जिसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस शामिल हुए। यह संगठन अब यूरेशिया में एक शक्तिशाली राजनीतिक और आर्थिक इकाई बन चुका है।

वर्षघटना/सदस्यतामहत्व
2001स्थापना6 मध्य एशियाई/पूर्वी एशियाई देशों द्वारा गठन
2017भारत और पाकिस्तान शामिलदक्षिण एशिया तक विस्तार
2023-24ईरान और बेलारूस शामिलयूरेशियाई एकीकरण में वृद्धि
2026पाकिस्तान की अध्यक्षताइस्लामाबाद के लिए नेतृत्व की भूमिका
क्या आप जानते हैं?: एससीओ को अक्सर 'पूर्व का गठबंधन' कहा जाता है और यह भौगोलिक कवरेज और जनसंख्या के मामले में दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम शहबाज शरीफ की किर्गिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेना, 2026-2027 के लिए एससीओ काउंसिल की अध्यक्षता संभालना और किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।

एससीओ के वर्तमान सदस्य देश कौन से हैं?
एससीओ में वर्तमान में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।