किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह बैठक एक बहुध्रुवीय दुनिया के निर्माण और यूरेशियाई सुरक्षा के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान और ईरान सहित प्रमुख शक्तियां एक छत के नीचे।
- संगठन की 25वीं वर्षगांठ पर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर।
- मध्य एशिया में सुरक्षा और आर्थिक गलियारों पर गहन चर्चा।
किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों का प्रतिबिंब है। इस वर्ष यह संगठन अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो इसकी स्थिरता और प्रभाव को दर्शाता है। इस सम्मेलन में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस और चार मध्य एशियाई देशों की भागीदारी ने इसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतर-सरकारी संगठनों में से एक बना दिया है।
ऐतिहासिक रूप से, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग ने एससीओ मंच का उपयोग पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने और एक 'बहुध्रुवीय दुनिया' (Multipolar World) के अपने दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए किया है। उनका तर्क है कि वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया केवल कुछ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें उभरती शक्तियों की समान भागीदारी होनी चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक कठिन संतुलन का कार्य है। एक ओर भारत रूस और मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी ओर चीन के साथ सीमा विवाद और पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच अपनी संप्रभुता की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। यह मंच यूरेशियाई क्षेत्र में कनेक्टिविटी और आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए अपरिहार्य है।
"एससीओ अब केवल एक सुरक्षा गठबंधन नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।"
इस सम्मेलन में बेलारूस का शामिल होना और ईरान की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि यह समूह अब अधिक समावेशी और राजनीतिक रूप से मुखर हो रहा है। सदस्य देशों के बीच व्यापारिक समझौतों और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा इस बात की पुष्टि करती है कि आर्थिक निर्भरता अब कूटनीति का मुख्य आधार है।
| विशेषता | पश्चिमी गठबंधन (G7) | एससीओ (SCO) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | लोकतांत्रिक मूल्य और आर्थिक स्थिरता | क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुध्रुवीयता |
| प्रमुख सदस्य | अमेरिका, कनाडा, यूके, जापान | रूस, चीन, भारत, ईरान |
| केंद्र बिंदु | वैश्विक शासन | यूरेशियाई एकीकरण |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एससीओ में भारत की भूमिका क्या है?
भारत एससीओ के माध्यम से मध्य एशिया में अपनी पहुंच बढ़ाता है और आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग सुनिश्चित करता है।
प्रश्न 2: बहुध्रुवीय दुनिया का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था जहाँ शक्ति केवल एक या दो महाशक्तियों के पास न होकर कई देशों के बीच विभाजित हो।