अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि कड़े प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। यह बयान G20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान आया है।

  • अमेरिका ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत ईरान पर व्यापक आर्थिक दबाव बनाया है।
  • विमानन, डिजिटल संपत्ति, सोना, तकनीक और शिपिंग सहित पांच प्रमुख क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • यूरोपीय संघ ने अमेरिका के इन कड़े कदमों का पूर्ण समर्थन किया है।

उत्तर कैरोलिना के एशविले में आयोजित G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान की गंभीर आर्थिक स्थिति पर चर्चा की। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर लाना है और इसके लिए आर्थिक दबाव का उपयोग किया जा रहा है।

बेसेंट ने CNBC को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान वर्तमान प्रतिबंधों को बहुत गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान द्वारा हाल ही में की गई सैन्य गतिविधियां वास्तव में उसकी आर्थिक कमजोरी का संकेत हैं। उनके अनुसार, जब कोई देश आर्थिक रूप से हारने लगता है, तो वह अक्सर आक्रामक प्रतिक्रिया देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' केवल एक प्रतिबंध अभियान नहीं है, बल्कि यह ईरान की वित्तीय जीवन रेखा को पूरी तरह काटने की एक सोची-समझी रणनीति है। यदि अमेरिका साप्ताहिक आधार पर नए प्रतिबंध लागू करता है और प्रमुख बैंकों को डॉलर-आधारित प्रणाली से बाहर करता है, तो ईरान के पास अपनी मुद्रा को स्थिर करने का कोई विकल्प नहीं बचेगा।

"ईरान की अर्थव्यवस्था आने वाले हफ्तों या महीनों में ध्वस्त हो सकती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है; बस शासन को अपनी गलती सुधारनी होगी।"

हालिया प्रतिबंधों की लहर में 60 विशिष्ट व्यक्तियों और जहाजों को लक्षित किया गया है। अमेरिका ने मिस्र के Banque Misr की यूएई शाखाओं पर भी कार्रवाई की है, जो ईरान के साथ वित्तीय संबंधों के कारण किया गया है। बेसेंट ने संकेत दिया कि आने वाले समय में कुछ वित्तीय संस्थानों को पूरी तरह से वैश्विक डॉलर प्रणाली से अलग किया जा सकता है।

इस बीच, फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य पर नहीं आती है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। ईरान-इजरायल तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में भारी उछाल आया है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल की कीमतें 24.6% तक बढ़ गई हैं।

क्षेत्रप्रतिबंध का प्रभावसंभावित परिणाम
वित्तीय प्रणालीडॉलर एक्सेस का नुकसानमुद्रा का अवमूल्यन
ऊर्जा/शिपिंगनिर्यात में गिरावटराजस्व में भारी कमी
तकनीक/डिजिटलआयात पर रोकऔद्योगिक ठहराव
क्या आप जानते हैं?: सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना, इस भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच 0.8% गिरकर $4,419.38 प्रति औंस के स्तर पर आ गया है।

Frequently Asked Questions

1. 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' क्या है?
यह अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान पर लगाया गया एक व्यापक आर्थिक दबाव अभियान है, जिसका उद्देश्य प्रतिबंधों के जरिए ईरान को शांति वार्ताओं के लिए मजबूर करना है।

2. क्या इन प्रतिबंधों का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है?
हाँ, इसके कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं और वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक (Nasdaq, S&P 500) गिरावट की ओर अग्रसर हैं।