किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मानकों' को समाप्त करने की पुरजोर मांग की।

  • पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहा है।
  • पीएम मोदी ने आतंकवाद को मानवता के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए 'दोहरे मानकों' की आलोचना की।
  • भारत ने कनेक्टिविटी के लिए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया।
  • एससीओ के अगले 25 वर्षों के लिए 'सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर' (S-C-O) के विजन को साझा किया।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक भू-राजनीति पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में चल रहा संकट केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में, एक क्षेत्र का संघर्ष वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) को बाधित करता है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने संवाद और कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताया, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध अपने छठे महीने में प्रवेश कर चुका है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह रुख न केवल शांति का संदेश है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों की रक्षा करने की एक रणनीतिक कोशिश है। जब ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं और व्यापारिक मार्ग बाधित होते हैं, तो इसका सबसे बुरा असर विकासशील देशों पर पड़ता है। भारत खुद को एक 'विश्व मित्र' और मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर रहा है।

आतंकवाद के मुद्दे पर पीएम मोदी का रुख बेहद सख्त रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश की 'रणनीतिक संपत्ति' (strategic asset) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और कट्टरपंथ के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने का आह्वान किया।

"आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में 'एक्शन-रिएक्शन' की मानसिकता से ऊपर उठकर एक साझा वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।"

कनेक्टिविटी के मुद्दे पर, भारत ने स्पष्ट किया कि वह व्यापार और बाजारों को जोड़ने वाली सभी पहलों का समर्थन करता है, लेकिन शर्त यह है कि संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए। यह सीधे तौर पर उन परियोजनाओं की ओर इशारा है जो अन्य देशों की जमीन से होकर गुजरती हैं।

पीएम मोदी ने एससीओ के लिए अपना विजन 'S-C-O' (Security, Connectivity, Opportunity) के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में इस संगठन को केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रखकर 'जन-केंद्रित' बनाना होगा, ताकि इसके लाभ सीधे युवाओं, उद्यमियों और किसानों तक पहुँच सकें।

क्या आप जानते हैं?: भारत एससीओ के माध्यम से मध्य एशिया तक अपनी पहुँच बनाना चाहता है क्योंकि पाकिस्तान ने भारत को overland transit (भूमि मार्ग) की सुविधा देने से इनकार कर दिया है।

Frequently Asked Questions

1. एससीओ (SCO) क्या है?
शंघाई सहयोग संगठन एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

2. पीएम मोदी ने 'दोहरे मानकों' की बात क्यों की?
पीएम मोदी का इशारा उन देशों की ओर था जो कुछ आतंकी समूहों को समर्थन देते हैं जबकि दुनिया के सामने आतंकवाद के खिलाफ होने का दावा करते हैं।