भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस‑यूक्रेन युद्ध को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा, जिसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वागत किया। दोनों देशों की इस पहल से अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति की नई उम्मीदें जागृत हुईं।
- मोदी‑शी ने संयुक्त शांति प्रस्ताव पेश किया
- पुतिन ने भारत‑चीन की पहल की सराहना की
- प्रस्ताव संभावित ब्रिक्स समिट में चर्चा का विषय बनेगा
पृष्ठभूमि
रूस‑यूक्रेन युद्ध के सात साल बाद भी संघर्ष जारी है, जिससे यूरोप और एशिया दोनों क्षेत्रों में मानवीय और आर्थिक संकट गहरा रहा है। इस बीच, ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में भारत और चीन ने इस मुद्दे को प्रमुख एजेंडा बनाया।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल
नई दिल्ली से जारी बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए तैयार है और “शांति के लिए रचनात्मक कदम” उठाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस प्रक्रिया में सहयोग करने का आग्रह किया।
शी जिनपिंग का समर्थन
बीजिंग में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन भी इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान में अपना योगदान देना चाहता है। उन्होंने कहा, “क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।”
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a joint India‑China diplomatic effort could reshape the geopolitical balance in Eurasia, potentially reducing Western influence and opening new channels for conflict resolution.
"यदि भारत‑चीन सहयोग सफल रहा, तो यह विश्व राजनीति में एक नया शक्ति संतुलन स्थापित कर सकता है," अंतर्राष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ डॉ. अंजलि सिंह ने कहा।
रूस की प्रतिक्रिया
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस प्रस्ताव का खुले दिल से स्वागत किया, यह कहते हुए कि "भारत और चीन के साथ मिलकर शांति के रास्ते खोजना रूस के लिए महत्वपूर्ण है"। पुतिन ने दोनों देशों को अपने प्रयासों में सफलता की कामना की।
Frequently Asked Questions
क्या भारत‑चीन का संयुक्त प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पेश किया गया है? हाँ, दोनों देशों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक संयुक्त बयान जारी किया है।
इस पहल से यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया क्या होगी? यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह सभी शांति प्रयासों का स्वागत करता है, परंतु शर्तें स्पष्ट और निष्पक्ष होंगी।