केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बेलग्रेड में सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिक से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। यह मुलाकात गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई।

  • केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बेलग्रेड में सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिक से मुलाकात की।
  • मुलाकात गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की 65वीं वर्षगांठ के दौरान हुई।
  • भारत और सर्बिया के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों और साझा हितों पर चर्चा हुई।
  • रिजिजू ने शांति, संप्रभुता और संवाद के महत्व पर बल दिया।

भारत के संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को बेलग्रेड में सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिक के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह उच्च स्तरीय मुलाकात बेलग्रेड के 'पैलेस ऑफ सर्बिया' में आयोजित गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई।

इस मुलाकात के दौरान, दोनों नेताओं ने भारत और सर्बिया के बीच की गहरी दोस्ती और निरंतर बढ़ते रणनीतिक संबंधों की पुष्टि की। रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बातचीत को 'गर्मजोशी से भरा और सार्थक' बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों की नींव पर टिके हुए हैं।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व

किरेन रिजिजू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत की संस्थापक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने याद दिलाया कि 1961 में बेलग्रेड में आयोजित पहला शिखर सम्मेलन इस आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक था। रिजिजू ने वैश्विक मंच पर जोर दिया कि आज के अस्थिर दौर में भी शांति, संप्रभुता, संवाद और राष्ट्रों के बीच सहयोग के सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का बाल्कन क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव और सर्बिया के साथ मजबूत होते संबंध वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। गुटनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर जोर देकर, भारत एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत कर रहा है जहाँ संप्रभुता सर्वोपरि है।

भारत और सर्बिया के बीच का यह संवाद केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति के लिए साझा दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है।

यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज और प्रभाव को विस्तार देने के लिए तत्पर है। सर्बिया के साथ सहयोग रक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए द्वार खोल सकता है।

Historical Background

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का उदय शीत युद्ध के दौरान हुआ था, जब दुनिया दो गुटों में बंटी हुई थी। भारत, मिस्र और यूगोस्लाविया जैसे देशों ने एक ऐसा रास्ता चुना जो किसी भी सैन्य गुट का हिस्सा न हो। बेलग्रेड, सर्बिया, इस ऐतिहासिक आंदोलन का केंद्र रहा है, जो भारत और सर्बिया के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करता है।

Did You Know?: गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड में ही आयोजित किया गया था, जिसने वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी थी।

Frequently Asked Questions

1. किरेन रिजिजू ने सर्बिया की यात्रा किस उद्देश्य से की?
रिजिजू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की 65वीं वर्षगांठ में भाग लेने और सर्बियाई राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए यह यात्रा की।

2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) क्या है?
यह उन देशों का समूह है जो किसी भी प्रमुख शक्ति गुट से संबद्ध नहीं होना चाहते और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं।